दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, यह कोई मामूली विस्फोट नहीं बल्कि 26/11 जैसी बड़ी वारदात की साजिश थी, जिसकी तैयारी महीनों से चल रही थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि आतंकियों का मकसद राजधानी समेत एनसीआर के कई अहम ठिकानों, जैसे- लाल किला, इंडिया गेट, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, मंदिरों, रेलवे स्टेशनों और मॉल्स को एक साथ निशाना बनाकर दहशत फैलाना था। शुरुआती जांच में इस मॉड्यूल के पास 200 से ज्यादा हाई-इम्पैक्ट IEDs बनाने की योजना के सबूत मिले हैं, जिससे यह साफ है कि अगर वक्त रहते साजिश का पर्दाफाश नहीं होता तो देश में एक बड़े हमले हो सकते थे।
जांच में पता चला है कि विस्फोट में इस्तेमाल हुई व्हाइट Hyundai i20 कार कुछ घंटे तक ब्रीफली पार्क करके रखी गई थी, और उसमें बैठे संदिग्ध पहचान हुई है डॉ. मोहम्मद उमर ने कार को घंटों तक न छोड़ा। पुलिस स्रोतों के अनुसार कार पार्क करके उसकी लोकेशन और सही टाइमिंग का इंतजार किया जा रहा था ताकि किसी हाई-प्रोफाइल निशाने पर अचानक हमला किया जा सके। स्रोत यह भी बताते हैं कि उसी पार्किंग-एरिया मंम हमलावर या उसके सहयोगी किसी निर्देश का इंतजार कर रहे थे, जिसके बाद उन्होने प्लान बदला और भीड़-भाड़ वाली जगह पर विस्फोट कर दिया। पुलिस के शुरुआती निष्कर्षों से यह भी पता चला कि लाल किला पर सीधे हमला करना लक्ष्य था, लेकिन उस दिन लाल किला बंद होने के कारण योजनाकारों ने लक्ष्य बदल दिया और भीड़-भाड़ वाले इलाके को निशाना बनाया। जांच में यह रेखांकित किया जा रहा है कि समय-सारिणी और स्थान बदलने का निर्णय अंतिम-पल में लिया गया। जांच आगे बढ़ने पर दिल्ली-हरियाणा के तालमेल से एक ‘डॉक्टर मॉड्यूल’ उभरकर सामने आया है। उनमें से कुछ डॉक्टरों पर शक है कि वे वाइट-कॉलर कवर का लाभ उठाकर इलाकों में आसानी से घूम-फिर रहे थे और विस्फोटक छिपाने-जतन करने में सक्रिय रहे। इन संदिग्धों से जुड़े कई रेंटेड कमरों और ठिकानों पर छापे मारे गए। मीडिया रिपोर्टों में लगभग 2,900 किलोग्राम तक सामग्री के ज़िक्र का हवाला दिया जा रहा है। वहीं, आरोपियों के किसी हिस्से पर जंकेशन के हिसाब से हाथों में हथियार और अन्य आपूर्ति भी मिली है। घटनास्थल और बरामद मदों की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी तथा फोरेंसिक-विशेषज्ञों की निगरानी में जारी है। साथ ही जांच के दायरे में और राज्यों के ठोस सुराग खोजने के लिए टीमें गठित की गई हैं। अधिकारियों ने कहा है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और और सबूत इकट्ठे किए जा रहे हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि लाल किला ब्लास्ट किसी एक व्यक्ति या घटना तक सीमित नहीं, बल्कि एक बड़े आतंक नेटवर्क की कड़ी है, जो एनसीआर में महीनों से सक्रिय था। रॉयल कार जोन के मालिक सोनू की गिरफ्तारी ने इस साजिश की परतें और खोल दी हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या कार डीलिंग की आड़ में कोई आतंकी फंडिंग या लॉजिस्टिक सपोर्ट नेटवर्क काम कर रहा था। सुरक्षा एजेंसियों की जांच कई दिशाओं में एक साथ चल रही है। विस्फोटक की सप्लाई चेन, वित्तीय लेन-देन, और संदिग्धों के डिजिटल कनेक्शन को ट्रेस किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है, लेकिन जांच में हर नई कड़ी एक और बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सच सामने आने में वक्त लगेगा, लेकिन अब जांच का फोकस “कौन था मास्टरमाइंड और कहां से मिला बारूद” पर टिका है।