पत्नी बनी ‘बोझ’: बांका में पति ने गला दबाकर की हत्या, शव बालू में दबाया

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के बांका जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक पति ने अपनी पहली पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी और सबूत छिपाने के लिए शव को नदी की बालू में दबा दिया। यह खौफनाक वारदात बुधवार (3 सितंबर, 2025) की देर रात करमा-धरमा पर्व के जश्न के दौरान आनंदपुर थाना क्षेत्र के अमजोरा गांव में हुई। हत्या के बाद आरोपी पति फरार है, जबकि पुलिस ने उसकी दूसरी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या हुआ उस रात?
पुलिस के अनुसार, अमजोरा गांव के निवासी शिवचरण दास ने अपनी 35 वर्षीय पहली पत्नी सावित्री देवी की बेरहमी से पिटाई करने के बाद गला दबाकर हत्या कर दी। इस जघन्य अपराध को अंजाम देने के बाद, आरोपी पति शव को ठिकाने लगाने के लिए दो किलोमीटर दूर बड़ुआ नदी के सती घाट पर ले गया। उसने शव को नदी के किनारे बालू में दबा दिया और फिर वहां से फरार हो गया।

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मायके वालों ने खोजा शव
जब इस घटना की जानकारी मृतका के मायके गोरियाडीह गांव के परिजनों को मिली, तो वे तुरंत अमजोरा पहुंचे। उन्होंने आनंदपुर थाना पुलिस के साथ मिलकर सावित्री देवी की तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद, नदी के किनारे बालू के नीचे से सावित्री देवी का शव बरामद हुआ। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और लोग हैरान हैं।

दूसरी पत्नी गिरफ्तार, पति फरार
पुलिस ने इस मामले में तेज़ी दिखाते हुए आरोपी की दूसरी पत्नी पूजा देवी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मुख्य आरोपी शिवचरण दास की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। आनंदपुर थानाध्यक्ष बिपिन कुमार ने शव को पोस्टमार्टम के लिए बांका भेज दिया है और मृतका के भाई हुरो दास के बयान पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

शादीशुदा जिंदगी में तनाव
पुलिस जांच और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, शिवचरण दास अपनी पहली पत्नी सावित्री को लंबे समय से प्रताड़ित कर रहा था। वह घर का खर्च तक नहीं देता था, जिसके कारण सावित्री देवी को मज़दूरी कर अपना और अपने बच्चों का भरण-पोषण करना पड़ता था। उनका 15 वर्षीय बेटा ब्रह्मदेव दास भी मज़दूरी करने के लिए सूरत गया हुआ है। करीब आठ साल पहले शिवचरण ने पूजा देवी से दूसरी शादी कर ली थी, जिससे उसके दो बच्चे भी हैं।

यह घटना यह बताती है कि कैसे कुछ लोग अपने संबंधों को छिपाने या दूसरी शादी के बाद पहली पत्नी को ‘बोझ’ समझने लगते हैं। इस दुखद अंत ने गांव में मातम और डर का माहौल बना दिया है।

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