सिटी पोस्ट लाइव : आने वाले समय में बिहार से भी कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसे बड़े वैज्ञानिक निकल सकते हैं.इस दिशा में अब पहल शुरू हो गई है.रोहतास जिले के तिलौथू स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में इसरो स्पेस लैब की स्थापना हो गई है. जिले के तिलौथू स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित इसरो स्पेस लैब प्रदर्शनी में छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान की रोमांचक दुनिया से रूबरू कराया जा रहा है. छात्रों को अंतरिक्ष यान, रॉकेट, उपग्रह और ग्रहों के 3D मॉडल देखने को मिल रहा है. जिससे वे अंतरिक्ष की जटिल तकनीकों को करीब से समझ सके. वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग प्रक्रिया, गगनयान मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों की जीवनशैली और मंगल मिशन की तैयारियों को लाइव डेमो के जरिए समझाया. सबसे रोमांचक अनुभव मॉडल रॉकेट निर्माण वर्कशॉप रहा, जहां छात्रों ने खुद छोटे-छोटे रॉकेट बनाए और रॉकेट साइंस की बारीकियों को सीखा.
इसरो के विक्रम साराभाई स्पेस एग्जीबिशन के प्रमुख परेश सरवैया के अनुसार अगर छात्र अंतरिक्ष को समझ सकते हैं, तो एक दिन वे उसे खोज भी सकते हैं. उन्होंने बताया कि इसरो के आउटरीच प्रोग्राम के तहत वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर छात्रों को यूनिवर्स, रॉकेट, सैटेलाइट्स और लॉन्चिंग व्हीकल्स की जानकारी दे रहे हैं, ताकि भविष्य में देश को और कलाम, कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसे वैज्ञानिक मिल सके. इस दौरान इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने इसरो के भविष्य के अभियानों, जैसे चंद्रयान-4, लूनेर पोलर एक्सप्लोरेशन (LuPEX) और गगनयान मिशन पर भी चर्चा की. वैज्ञानिकों ने बताया कि LuPEX मिशन के तहत भारत चंद्रमा की सतह से मिट्टी के नमूने लाकर पृथ्वी पर परीक्षण करेगा, गगनयान मिशन भारत का पहला ऐसा अंतरिक्ष अभियान होगा, जिसमें भारतीय धरती से अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा.
वैज्ञानिकों ने बिहार के छात्रों की विशेष रूप से सराहना की और बताया कि इसरो के सिर्फ़ एक केंद्र में लगभग 100 से अधिक वैज्ञानिक सिर्फ बिहार से हैं. उन्होंने बताया कि बिहार के छात्रों में अपार संभावनाएं हैं और अगर उन्हें सही मार्गदर्शन मिले, तो वे भी अंतरिक्ष अनुसंधान और विज्ञान के क्षेत्र में बड़ा योगदान दे सकते हैं. इसरो के प्रमुख वैज्ञानिकों में से एक और मूलरूप से बिहार के औरंगाबाद जिले के रहने वाले दीपक सिंह ने बताया कि विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में बिहार के छात्रों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है. आने वाले 20-30 वर्षों में अंतरिक्ष विज्ञान तेजी से उभरेगा और बिहार को भी इसमें बढ़-चढ़कर भाग ले सकेगा.
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स्कूल के प्राचार्य डॉक्टर मैकू राम के अनुसार छात्रों को स्पेस साइंस के प्रति जागरूक करने के लिए इस इस प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है, ताकि आने वाले समय में बिहार से भी कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसे बड़े वैज्ञानिक निकल सके, यहां के छात्र-छात्राएं काफ़ी प्रतिभावान हैं और यदि उन्हें सही दिशा दी जाए, तो वे विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं. ऐसे कार्यक्रमों को बिहार के अन्य स्कूलों तक ले जाने की योजना बनाई जानी चाहिए. जिससे अधिक से अधिक छात्रों को विज्ञान और अनुसंधान से जोड़ा जा सके.