सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा का सत्र 1 से 5 दिसंबर तक चलेगा। इस सत्र में कई महत्वपूर्ण गतिविधियाँ और बदलाव देखने को मिलेंगे। नई सरकार बनने के बाद, यह सत्र विधानसभा में नए अध्याय की शुरुआत करेगा। नई सरकार के गठन के बाद, बिहार विधानसभा का सत्र 1 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है, जो 5 दिसंबर तक चलेगा। इस 5 दिन के सत्र में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ और बदलाव होंगे। सत्र के पहले दिन, यानी 1 दिसंबर को, सभी नवनिर्वाचित विधायक प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव द्वारा शपथ लेंगे। इस बार विधानसभा में 202 सदस्य सत्ता पक्ष के होंगे, जो कि 2010 के बाद पहली बार हो रहा है, जबकि विपक्ष के पास 35 सदस्य होंगे।
पहले और दूसरे दिन की प्रमुख गतिविधियाँ:
पहले दिन, दोपहर में विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के लिए नामांकन होगा। बीजेपी के डॉ. प्रेम कुमार विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। अगर एक से अधिक नामांकन होते हैं, तो 2 दिसंबर को चुनाव होगा, जबकि एक नामांकन होने की स्थिति में डॉ. प्रेम कुमार को निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा की जाएगी।
तीसरे, चौथे और पांचवे दिन की गतिविधियाँ:
तीसरे दिन यानी 3 दिसंबर को विधानमंडल के दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन होगा, जिसमें राज्यपाल का अभिभाषण होगा। इसके बाद 4 दिसंबर को राज्यपाल के अभिभाषण पर वादविवाद होगा और सरकार इसका उत्तर देगी। 5 दिसंबर को, दोनों सदनों में सेकेंड सप्लीमेंट्री पेश किया जाएगा और उसके बाद विनियोग विधेयक लाए जाएंगे। इस प्रकार, सत्र समाप्त होगा।
नई तकनीकी सुविधाएँ:
इस बार के सत्र में नई तकनीक का उपयोग किया जाएगा। विधानसभा में हर विधायक की सीट पर टैबलेट लगाए गए हैं, जिनके जरिए वे प्रश्न पूछ सकेंगे। इससे विधानसभा में कागज का उपयोग कम हो जाएगा और कार्यवाही डिजिटल रूप में चल सकेगी। यह नेवा योजना के तहत विधानसभा को डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस सत्र के दौरान, नई सुविधाओं और कार्यप्रणाली को लेकर सदन में कई बदलाव देखने को मिलेंगे, जो विधायकों और नागरिकों दोनों के लिए एक सकारात्मक बदलाव होगा।