सिटी पोस्ट लाइव
महाकुम्भ नगर । विद्या भारती का मुंख्य उद्देश्य शिक्षा के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को भारतीय संस्कार भी देना है, जिससे उनके अन्दर राष्ट्रभक्ति का भाव जागृत हो और वह एक अच्छे इन्सान बनकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें सके। उक्त विचार क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचन्द्र ने गुरूवार को विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र द्वारा आयोजित महाकुम्भ दर्शन शिविर में कानपुर प्रान्त संस्कार केन्द्रो के छात्र-छात्राओं के तीन दिवसीय शिविर में व्यक्त किए।
उन्होंने संस्कार केन्द्र के छात्र-छात्राओं एवं उनके अभिभावकों को सम्बोधित करते हुये कहा कि प्रत्येक माता पिता अपनी सन्तान को ज्ञान के साथ-साथ संस्कारवान भी बनाना चाहते हैं। उन्होंने राम-रावण का उदाहरण देते हुये कहा कि रावण अत्यन्त ज्ञानी होने के साथ-साथ बलशाली भी था। किन्तु उनके अन्दर सुसंस्कार न होने के कारण संसार में उनकी छवि एक राक्षस के रुप में विख्यात है। जबकि राम अपने ज्ञान एवं सुसंस्कारों के कारण से संसार में मयार्दा पुरुषोत्तम के रुप में पूजे जाते हैं।
इसी प्रकार संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान ने विद्यालयो की शुरूआत की। इस समय पूरे देश के अन्दर लगभग 12,500 एकल शिक्षा केन्द्र चल रहे हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र में भी 1000 केन्द्र चल रहे हैं। विद्या भारती के तहत हजारों शिक्षण संस्थान संचालित होते हैं। क्षेत्रीय सेवा प्रमुख योगश ने कार्यक्रम की प्रस्ताविकी रखते हुये कहा कि विद्या भारती द्वारा आज संस्कार केन्द्रों के माध्यम से समाज के वंचित एवं झुग्गी झोपाड़ियों मे निवास करने वाले छात्र-छात्राओं को शिक्षा देने का जो कार्य किया जा रहा है, वह अत्यन्त ही सराहनीय एवं नेक कार्य है।
हमारे देश में अनेको अभावग्रस्त क्षेत्र भी हैं, जहाँ विद्या भारती ने विचार किया कि ऐसे क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को भी अच्छी शिक्षा एवं संस्कार मिल सकें। इसके लिए इन क्षेत्रों में एकल शिक्षा केन्द्र एवं संस्कार केन्द्र का प्रारम्भ किया जाये। इस अवसर पर सह क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर, कानपुर प्रान्त के संगठन मंत्री रजनीश, प्रदेश निरीक्षक शेषधर द्विवेदी, विद्या भारती काशी प्रान्त के प्रान्त प्रचार प्रमुख ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य विक्रम बहादुर सिंह परिहार उपस्थित रहे।