बेऊर जेल पहुंचे 5वें बाहुबली, कभी साइकिल छीनने वाले रीतलाल यूं बने बाहुबली, पूरी कहानी

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
पटना :
बेऊर जेल में चार बाहुबली पहले से बंद थे। अनंत सिंह, मुन्ना शुक्ला, राजबल्लभ यादव, गुलाब यादव। पांचवें बाहुबली रीतलाल यादव की आज ऐंट्री हो गई। अनंत सिंह ने सोनू-मोनू गैंग के साथ मोकामा में गोलबारी के बाद सरेंडर किया था। राजबल्लभ यादव नाबालिग लड़की से रेप के मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहा है। मुन्ना शुक्ला पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड में उम्र कैद की सज़ा काट रहा है। गुलाब यादव मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में जेल में बंद हैं। पांचवें बाहुबली रीतलाल यादव की आज पीले शर्ट में बेऊर जेल के मेन गेट से ऐंट्री होती है। रीतलाल ने कारोबारी से रंगदारी के मामले में सरेंडर किया है। आज जिन रीतलाल के लिए बेऊर जेल का मेन गेट खुला है और जो माननीय और बाहुबली बन चुके हैं, उनके पुलिस रिकॉर्ड की मानें, तो वे एक समय साइकिल छीना करते थे। उनका गांव दानापुर रेलवे स्टेशन के पास है। कोथावां गांव। यह गांव कुर्मी बाहुल्य था। इलाके में कुर्मियोंं की तूती बोलती थी, लेकिन 1995 के बाद, इस इलाके में यादवों का वर्चस्व बढ़ा। इस दौरान रीतलाल कोथावां से दानापुर स्टेशन के रास्ते में लोगों से साइकिल छीनते थे, यह पुलिस का रिकॉर्ड बताता है। धीरे-धीरे दानापुर का विकास होने लगा और खेती की ज़मीनों पर बड़ी-बड़ी इमारतें बनने लगीं। हालत यह हो गई कि जो ज़मीन पर कुछ बनवाना चाहता था, पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उससे रीतलाल रंगदारी वसूलने लगे। धीरे-धीरे रीतलाल की करीबी सूरजभान और हुलास पांडेय से बढ़ी और रेलवे के ठेके में रीतलाल का सिक्का चलने लगा। रेलवे के दानापुर और समस्तीपुर डिवीजन में हर ठेके में रीतलाल की मर्ज़ी चलने लगी। 2005 में लालू यादव की सरकार चली गई। नीतीश कुमार की सरकार बनी। नीतीश सरकार में रीतलाल पर शिकंजा कसा जाने लगा। रीतलाल यादव की कई संपत्तियां जब्त की गईं, लेकिन रीतलाल पर कोई फ़र्क नहीं पड़ा। वे अपना पैसा और अपनी ताकत बढ़ाते चले गए। 2014 में तो जो हुआ उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। चारा घोटाले में सज़ा होने के बाद जब लालू यादव की सदस्यता चली गई, तो 2014 में पाटलिपुत्रा लोकसभा क्षेत्र से लालू यादव ने अपनी बेटी मीसा भारती को उतारा। मीसा को चुनाव जीताने के लिए लालू यादव रीतलाल यादव के घर गए और रीतलाल यादव के पिता की मदद मांगी। उस समय रीतलाल जेल में बंद थे। हालांकि, रीतलाल ने मीसा को चुनाव जितवाने की काफ़ी कोशिश की लेकिन मीसा चुनाव हार गईं, लेकिन उसके बाद से रीतलाल सुर्खियों में बने रहे। 2016 में रीतलाल ने निर्दलीय एमएलसी का चुनाव लड़ा और चुनाव जीत गए। 2020 में रीतलाल दानापुर से आरजेडी के टिकट पर विधायक बने, लेकिन ठेकेदारी का काम चलता रहा। रंगदारी मांगने के आरोप भी लगता रहा। रीतलाल पर आरोप लगता है कि वे कारोबारियों, ज़मीन के मालिकों से धमकी देकर पैसे की उगाही करते हैं। अब रीतलाल जेल में हैं, इस बार पुलिस ने उनपर कड़ा शिकंजा कसा है। देखना यह है कि रीतलाल पर पुलिस का शिकंजा कसता है या रीतलाल पुलिस के शिकंजे को तोड़कर बाहर निकल जाते हैं।

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