इसबार भी नीतीश कुमार को मिलेगा महिलाओं का साथ?

City Post Live

क्या महिलाएं फिर बनवाएंगी नीतीश की सरकार?:CM ने 30 दिन में की 6 बड़ी घोषणाएं, पेंशन-सैलरी बढ़ाई; 3 करोड़ वोटर्स के लिए ट्रंप कार्ड


सिटी पोस्ट लाइव : बिहार में विधानसभा चुनाव को महज 3 महीने बचे हैं. ऐसे में सभी पार्टियां महिला वोटरों को साधने में जी-जान से जुटी हैं.सत्ता में आने पर विपक्ष महिलाओं को माई-बहन सम्मान योजना के तहत 2500 रुपए महीना देने का वादा कर रहा है.दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बैक टू बैक महिलाओं को लेकर घोषणाएं कर रहे हैं.बीते एक महीने में CM नीतीश कुमार ने महिलाओं को लेकर 6 बड़ी घोषणाएं की है.21 जून 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीविका दीदियों और कर्मचारियों से जुड़े दो बड़े फैसले किए.पहला- स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी जीविका दीदियों को 3 लाख से ज्यादा के बैंक लोन पर 3 फीसदी की कटौती कर दी. उन्हें अब सिर्फ 7 प्रतिशत ब्याज देना होगा. पहले 3 लाख रुपए से ज्यादा के बैंक ऋण पर 10% ब्याज देना पड़ता था.दूसरा- जीविका स्वयं सहायता समूह के सभी 1 लाख 40 हजार कर्मचारियों की सैलरी को दोगुना कर दिया.इससे ऐसे में ब्लॉक कर्मचारियों को 50 हजार और गांव के कर्मचारियों को 25 हजार रुपए तक की सैलरी मिलेगी. 2006 में शुरू हुई जीविका परियोजना से लगभग 1 करोड़ 40 लाख जीविका दीदियां आत्मनिर्भर बन चुकी हैं. लोन के ब्याज में कटौती से उन्हें सीधा फायदा होगा.जीविका से अमूमन गरीब तबके की महिलाएं जुड़ी हैं. सरकार के फैसले से उन पर बड़ा असर पड़ेगा.

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

चुनाव से पहले पढ़ी-लिखी महिलाओं को अपने पाले में करने के लिए सरकार ने बड़ा दांव खेला है.8 जुलाई को नीतीश कैबिनेट ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को मिलने वाले 35 फीसदी क्षैतिज आरक्षण में डोमिसाइल नीति को लागू कर दिया. यानी अब दूसरे राज्य की महिला अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा. उन्हें सामान्य श्रेणी में ही आवेदन करना होगा.चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले सरकार 1 लाख टीचरों, 6500 लाइब्रेरियन, सिपाही, इंजीनियर आदि की बहाली निकालने वाली है. इन बहालियों में डोमिसाइल लागू रहेगा. बिहार में होने वाली सरकारी नौकरी की बहाली में डोमिसाइल को लागू करने की मांग पुरजोर तरीके से उठ रही थी. ऐसे में नीतीश सरकार ने पूरी बहाली में इसे लागू ना कर महिलाओं की कैटेगरी में लागू किया है.

30 जुलाई को सरकार ने आशा और ममता कार्यकर्ताओं के पैसे में बढ़ोतरी का ऐलान किया. अब ‘आशा’ को 1 हजार की बजाय 3 हजार मासिक और ‘ममता’ को प्रति प्रसव 300 की जगह 600 रुपए मिलेंगे.इससे 95 हजार ‘आशा’ और 4600 ‘ममता’ कार्यकर्ताओं को फायदा होगा। और 29 हजार आशा कार्यकर्ताओं की बहाली चल रही है.आशा और ममता कार्यकर्ताओं की पहुंच घर तक होती है. इनकी संख्या भी ठीक-ठाक है. पैसा बढ़ने से इनका मनोबल बढ़ेगा और सरकार की बातों को घर-घर तक पहुंचा सकती है.सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि 400 रुपए प्रति महीन से बढ़ाकर 1100 प्रति माह कर दिया गया है. लाभार्थियों को जुलाई से पेंशन बढ़ी हुई दर पर मिलनी शुरू हो गई है.खाते में यह राशि महीने की 10 तारीख को चली जायेगी.इससे विधवा महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों को फायदा होगा. इनकी संख्या करीब एक करोड़ 9 लाख है. 2020 विधानसभा चुनाव में बुजुर्गों के अंदर NDA के प्रति गुस्सा दिखा था. CSDS-लोकनीति के पोस्ट पोल सर्वे में बताया गया कि 60 साल से अधिक उम्र के लोगों ने NDA को 5 फीसदी कम वोट किया था.अब माना जा रहा है कि सरकार ने बुजुर्गों का भरोसा जीतने के लिए यह दांव चला है.

केंद्र सरकार ने 2023 में लखपति दीदी योजना को लॉन्च किया था. इस योजना के तहत सरकार महिलाओं को बिना ब्‍याज के 5 लाख रुपए तक का लोन प्रोवाइड कराती है. यह स्‍कीम स्‍वयं सहायता ग्रुपों से जुड़ी महिलाओं के लिए है.इस योजना के तहत स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाती है और फिर अपना खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए बिना ब्‍याज के 5 लाख रुपए तक लोन दिया जाता है. इस योजना का फायदा बिहार की महिलाएं भी उठा रही हैं. सरकार की सोच महिलाओं का आत्मनिर्भर बनाना है. जब महिलाएं सेल्फ डिपेंडेंट होंगी तो उनकी राजनीतिक सोच भी बदल सकती है. इसका फायदा NDA सरकार उठाने का प्रयास कर रही है.

महिलाओं की छोटी–छोटी जरूरतों से जुड़े मसलन जैसे- पिंक टॉयलेट, पिंक बस, जिम ऑन व्हील्स, महिला हाट, गरीब कन्याओं के विवाह के लिए कन्या मंडप, गर्ल्स हॉस्टल, महिलाओं को ई–रिक्शा की खरीदारी पर सब्सिडी शामिल हैं. ये अनाउसमेंट महिलाओं की सुविधाओं से जुड़े थे, इनसे महिलाओं को छोटे–छोटे रोजगार मिलेंगे.कन्या मंडप के जरिए पहली बार गरीब कन्याओं की शादी की व्यवस्था सरकार करने जा रही है. कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के लिए हॉस्टल की व्यवस्था होगी. इससे नौकरीपेशा महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी. महिलाओं सिपाहियों के लिए भी सरकार किराये पर कमरा लेगी.बिहार में महिलाओं की आबादी करीब 6 करोड़ है, और ये नीतीश कुमार का वोट बैंक मानी जाती हैं. हालांकि, सरकार की योजनाओं से सिर्फ उन महिलाओं को रोजगार मिलेगा, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है, और जो कम पिढ़ी–लिखी हैं.

नीतीश कुमार ने अपने शुरुआती कार्यकाल में काम करके महिलाओं को अपना वोट बैंक बनाया. 2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने महिलाओं को अपने पाले यानी अपना वोट बैंक बनाने के लिए कई बड़े निर्णय लिए थे. पंचायत में महिलाओं को 50 फीसदी रिजर्वेशन,2006 में नीतीश कुमार ने पंचायती राज में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण लागू किया. तब बिहार देश का पहला राज्य था, जिसने पंचायती राज में महिलाओं को इतना बड़ा रिजर्वेशन दिया.महिलाओं की मांग पर 2016 में शराबबंदी लागू की.इस कानून का उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा को कम करना और राज्य में अपराध दर को नियंत्रित करना था. नीतीश कुमार ने अपने चुनाव अभियान के दौरान शराबबंदी का वादा किया था और सरकार बनने के बाद इसे लागू किया. CM नीतीश कुमार ने 2018 में मुख्यमंत्री उत्थान योजना लॉन्च किया. इसका उद्देश्य राज्य की लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. इसके तहत बालिका के जन्म पर 5,000 रुपए दिया जाता है.10वीं और 12वीं पास करने पर 10,000 रुपए और ग्रेजुएशन करने पर 50,000 रुपए तक की सहायता राशि दी जाती है. इस योजना का लाभ लगभग एक करोड़ 6 लाख लड़कियों को मिलने की उम्मीद है. स्कूल जाने के लिए लड़कियों को साइकिल और पोशाक योजना शुरू की.

2010 में महिलाओं ने पुरुषों से अधिक वोट डाला.2010 के बिहार चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ था जब विधानसभा चुनाव में वोट डालने के मामले में महिलाएं आगे रही थीं. तब पुरुषों का टर्नआउट 53 फीसदी और महिलाओं का 54.5 फीसदी रहा था. इस चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी को 115 सीटें मिली थीं. पंचायत में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने और जीविका योजना शुरू होने से उनके अंदर राजनीतिक चेतना जागी. इसका परिणाम हुआ कि वह बूथ तक गईं.


2015 विधानसभा चुनाव में 51.1 फीसदी पुरुषों के मुकाबले 60.4 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया था. उस वक्त नीतीश कुमार की पार्टी JDU का लालू यादव की पार्टी RJD से गठबंधन था. उस वक्त JDU 101 सीटों पर लड़ी जिसमें से 71 सीटें जीती. महागठबंधन 178 सीट जीता था.2020 बिहार विधानसभा चुनाव में 54.6 फीसदी पुरुषों ने वोट किया था. 59.7 फीसदी महिलाओं ने वोट किया था, जो पुरुषों के मुकाबले 5 फीसदी अधिक था.2020 में सत्ता विरोधी लहर के बीच महिलाओं ने ही नीतीश सरकार की सरकार में वापसी कराई थी. तब JDU 43 सीटों जीती थी. सीटें कम होने का सबसे बड़ा कारण चिराग पासवान का अलग लड़ना माना गया था.महिलाएं शराबबंदी की पक्षधर हैं और उन्हें नीतीश कुमार पर ही भरोसा है.

Share This Article