कहानी 3 शराब तस्करों की, जो बन गए करोड़पति.

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सिटी पोस्ट लाइव : पूर्ण शराबबंदी वाले बिहार में शराब का अवैध कारोबार करनेवालों द्वारा करोड़ों अरबो की सम्पति कमा लेने की कहानी चौका देनेवाली है. शराब उस भगवन की तरह हो गई है जो कहीं दिखती नहीं लेकिन होती हर जगह है. एक फोन घुमाइए वह सीधे घर पहुँच जायेगी.इस शराब के कारोबार से ‘रातों-रात अमीर बनने की कहानियाँ चौका देनेवाली हैं. शराब के अवैध कारोबार से कैसे सैकड़ो खाकपति करोडपति बन गये हैं, जानने के लिए बात करेगें सिटी पोस्ट लाइव के संपादक shrikant प्रत्यूष से .

एक्सपर्ट के मुताबिक, चुनावी साल में तो शराब की तस्करी दोगुनी हो गई है. पुलिस विभाग के आंकड़े के मुताबिक, 2024 की तुलना में इस साल अब तक शराब जब्ती 26 प्रतिशत बढ़ी है.बीते 7 महीने (1 जनवरी से लेकर 31 जुलाई तक) में 39 लाख लीटर शराब जब्त की गई है. इसे अलग-अलग खेप और रूट से लाया गया. जब्त शराब की कीमत करीब 245 करोड़ रुपए है.

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समस्तीपुर के विभूतिपुर का वीडियो राय बड़ा शराब माफिया है. इसका कनेक्शन यूपी के बुलंदशहर के रहने वाले सुनील भारद्वाज और अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले फुंसो दोरजी करीमी से था. तीनों के ऊपर बिहार के अलग-अलग जिलों में 22 केस दर्ज हैं.बिहार पुलिस की मद्य निषेध इकाई ने गुवाहटी के एक होटल से दोनों पार्टनर को गिरफ्तार किया था. जांच में चौंकाने वाली बात सामने आई थी. सुनील 12 कंपनियों का मालिक था. इसमें 6 कंपनी फर्जी तरीके से चल रही थी. इनमें 4 कंपनी शराब बनाती थी. दोनों पार्टनर के फर्जीवाड़ा में वीडियो राय भी शामिल था.

सुनील के पास दो चैरिटेबल ट्रस्ट थे. इसके जरिए ब्लैक मनी को व्हाइट में बदला जाता था. इन तीनों का मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) तक पहुंचा. इसके बाद ED ने बिहार, यूपी, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और अरुणाचल प्रदेश में ठिकाने पर छापेमारी की थी. शराब के रुपए से बनाई गई संपत्ति को अटैच किया था.अवैध तरीके से बिहार में विदेशी शराब की खेप भेजने वाला अनिल सिंह बड़ा माफिया था. झारखंड के बोकारो में परिवार रहता है. बियाडा की जमीन पर इसने बॉटलिंग प्लांट लगाया था. फैक्ट्री दिखावे की थी. फैक्ट्री में अनिल ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली शराब बनाता था. फिर उसकी सप्लाई बिहार के अलग-अलग जिलों में करता था.लंबे वक्त से इसका खेल चल रहा था.

2021 में मलयपुर थाना के तहत इसकी शराब की खेप लेकर जा रही एक ट्रक पकड़ी गई. फिर पटना के आलमगंज और बांका में भी अलग-अलग खेप पकड़ी गई.तब मद्य निषेध इकाई की टीम ने झारखंड के बोकारो में इसके ठिकाने पर छापेमारी की थी। वह फरार हो गया था, पर फैक्ट्री सील कर दी गई थी.वहां से अलग-अलग कंपनियों के नाम पर बने रैपर बरामद हुए थे. डेढ़ लाख लीटर से अधिक शराब भी जब्त हुई थी. इसे बिहार भेजा जाना था. लंबे वक्त के बाद दिल्ली में छापेमारी कर अनिल को एक फाइव स्टार होटल से गिरफ्तार कर बिहार लाया गया था.

पंकज कुमार और दिनेश कुमार समस्तीपुर जिले के मूल निवासी हैं. बिहार में शराब बंदी लागू होने के बाद ये दोनों पंजाब चले गए. लुधियाना में डाबा थाना के तहत पिपरा चौक इलाके में घर बनाया और वहीं रहने लगे. ये दोनों विदेशी शराब की खेप को बिहार भेजने लगे. बिहार पुलिस की मद्य निषेद्य इकाई के रिकॉर्ड के अनुसार ये दोनों हर महीने 10 ट्रक विदेशी शराब की खेप पंजाब से भेजा करते थे. इस धंधे से दोनों ने अकूत संपत्ति बनाई. करोड़ों रुपए की कमाई की.इनके बारे में पुलिस को पहली बार तब पता चला, जब सारण जिले में शराब से भरी पूरी एक ट्रक पकड़ी गई. रिविलगंज थाना में FIR नंबर 270/22 दर्ज हुई थी. जांच करते हुए मद्य निषेद्य इकाई की टीम पंजाब गई. लुधियाना में छापेमारी की और फिर दोनों को वहां से गिरफ्तार कर बिहार लाया गया.

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