उपराष्ट्रपति चुनाव: राधाकृष्णन बनाम रेड्डी, संख्याबल में NDA आगे

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
भारत के अगले उपराष्ट्रपति का चुनाव आज (मंगलवार, 9 सितंबर, 2025) हो रहा है, जिसमें महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन और पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सुदर्शन रेड्डी आमने-सामने हैं। यह चुनाव निवर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से अचानक इस्तीफा देने के लगभग दो महीने बाद हो रहा है।

एनडीए का पलड़ा भारी
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान सुबह 10 बजे से शुरू हो गया है, जो शाम 5 बजे तक चलेगा। इसके बाद शाम 6 बजे से मतगणना शुरू हो जाएगी। इस चुनाव में राज्यसभा और लोकसभा के सभी सदस्य मतदान करते हैं। वर्तमान में, लोकसभा में 542 (एक सीट खाली) और राज्यसभा में 240 ( सीटें खाली) सदस्य हैं, जिससे कुल प्रभावी संख्या 781 है। इन आंकड़ों के अनुसार, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है। एनडीए के पास दोनों सदनों में स्पष्ट बहुमत है, जिसके कुल 422 सदस्यों का समर्थन उसे प्राप्त है।

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इस बीच, बीआरएस, बीजेडी, शिरोमणि अकाली दल और दो निर्दलीय सांसदों (कुल 14 सांसद) ने मतदान से दूर रहने का फैसला किया है। इससे जीत का आंकड़ा 384 हो गया है, जिसे एनडीए आसानी से पार कर सकता है।

दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से
इस चुनाव की एक खास बात यह है कि दोनों प्रमुख उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं। एनडीए ने तमिलनाडु के सीपी राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है, जो गोवंदर-कोंगु वेल्लालर समुदाय से आते हैं। 68 वर्षीय राधाकृष्णन एक शांत और गैर-विवादास्पद व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। वह तमिलनाडु से अकेले ऐसे भाजपा नेता हैं, जो 1998 और 1999 में दो बार लोकसभा के लिए चुने गए। वह 31 जुलाई 2024 से महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं।

वहीं, विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने सीपी राधाकृष्णन के मुकाबले पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है। 79 वर्षीय रेड्डी भी दक्षिण भारत से हैं। वह जुलाई 2011 में सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए थे और कई ऐतिहासिक फैसलों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने उस समय की केंद्र सरकार की ब्लैक मनी मामलों की जांच में शिथिलता की आलोचना की थी और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नक्सलियों से लड़ने के लिए नियुक्त ‘सलवा जुडूम’ को भी असंवैधानिक घोषित किया था।

चुनाव की आवश्यकता
गौरतलब है कि जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों से अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद यह चुनाव कराना आवश्यक हो गया था। उनका इस्तीफा संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत प्रभावी हुआ था। धनखड़ 2022 से उपराष्ट्रपति के पद पर थे और इससे पहले 2019 से 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में सेवा दे चुके थे।

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