बिहार चुनाव: सीमांचल पर अड़ी कांग्रेस, गठबंधन में अब नहीं चलेगा समझौता

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर गहमागहमी तेज हो गई है। इस बार कांग्रेस ने पिछली बार की गलतियों से सबक लेते हुए एक ठोस रणनीति तैयार की है, जिसमें वह नंबर गेम की बजाय जीतने वाली सीटों पर फोकस कर रही है। कांग्रेस ने खास तौर पर मुस्लिम और दलित बहुल सीटों को अपने रडार पर रखा है और इसी क्रम में सीमांचल क्षेत्र की सीटों पर कोई समझौता न करने का मन बना लिया है।

कांग्रेस ने बिहार में अपनी चुनावी तैयारी पूरी कर ली है और राहुल गांधी की ‘वोट अधिकार यात्रा’ के बाद पार्टी ने सीटों का चयन कर लिया है। दिल्ली में बिहार कांग्रेस नेताओं की पार्टी हाईकमान के साथ हुई दो दिवसीय बैठक में उन सीटों की सूची सौंपी गई है, जिन पर कांग्रेस चुनाव लड़ना चाहती है।

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जीत वाली सीटों पर फोकस
2020 के विधानसभा चुनाव में, कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन केवल 19 सीटें ही जीत पाई थी। कांग्रेस के रणनीतिकारों ने इस बार की गलती को दोहराने से बचने के लिए उन सीटों का चयन किया है, जिन पर उसकी जीत की संभावना सबसे ज्यादा है। इसमें मौजूदा विधायकों की सीटें और वे सीटें शामिल हैं, जहां कांग्रेस पिछली बार दूसरे स्थान पर रही थी।

इस बार कांग्रेस 70 से कम सीटें लेने के लिए भी तैयार है, लेकिन उसकी शर्त यह है कि ये सीटें विनिंग फॉर्मूला वाली होनी चाहिए। बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्ण अल्लावरू ने भी इस बात का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन में नए सहयोगियों को जगह देने के लिए सभी को समझौता करना होगा, लेकिन सीटों का बंटवारा करते समय अच्छी और खराब सीटों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि 15 सितंबर तक सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला हो जाएगा।

एम-डी समीकरण पर भरोसा
कांग्रेस का मानना है कि बिहार में उसकी जीत का समीकरण एम-डी (मुस्लिम-दलित) वोटों पर निर्भर करता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को उन्हीं सीटों पर सफलता मिली, जहां मुस्लिम और दलित मतदाता निर्णायक थे। कांग्रेस ने इन्हीं वोटबैंक के आधार पर मुस्लिम और दलित बहुल सीटों को चुना है। इसी रणनीति के तहत, सीमांचल क्षेत्र कांग्रेस की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।

सीमांचल को कांग्रेस अपने लिए एक मजबूत गढ़ मानकर चल रही है। कांग्रेस के चार में से तीन सांसद (तारिक अनवर, डॉ. मो. जावेद, और पप्पू यादव) इसी क्षेत्र से आते हैं। मुस्लिम बहुल होने के कारण भी यह इलाका कांग्रेस के लिए मुफीद है। इसीलिए कांग्रेस ने सीमांचल की 26 सीटों में से 16 पर चुनाव लड़ने का प्लान बनाया है और इन सीटों पर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। कांग्रेस का लक्ष्य इन सीटों के जरिए बिहार में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाना है।

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