बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग पूरी होते ही अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि आखिर आदर्श आचार संहिता कब हटेगी। चुनाव खत्म होने के साथ ही कई तरह की प्रशासनिक और राजनीतिक पाबंदियां हट जाती हैं, जिससे सरकारी कामकाज की रफ्तार फिर तेज हो जाती है। ऐसे में जानना जरूरी है कि चुनाव आयोग के नियमों के तहत आचार संहिता कब समाप्त होती है और इसके हटते ही शासन-प्रशासन में क्या-क्या बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं।
आचार संहिता लगते ही किन चीज़ों पर लग जाती है रोक:
– नई सरकारी भर्तियाँ या परीक्षाओं का आयोजन नहीं किया जा सकता।
– शराब के ठेकों की नीलामी और नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगती है।
– सरकारी विज्ञापन, होर्डिंग्स और पोस्टर जारी करने की मनाही होती है।
– किसी भी नई योजना, शिलान्यास या उद्घाटन कार्यक्रम की घोषणा नहीं की जा सकती।
– अधिकारियों का तबादला चुनाव आयोग की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता।
– जनसभाएँ सुबह 6 बजे से पहले या रात 10 बजे के बाद आयोजित नहीं की जा सकतीं।
– साथ ही, मीडिया पर सरकारी खर्च से विज्ञापन देने पर भी पूरी तरह प्रतिबंध होता है।
आचार संहिता के हटते ही राजनीतिक गलियारों में फिर से हलचल बढ़ जाती है और शासन-प्रशासन की रफ्तार लौट आती है। नई योजनाओं पर काम शुरू होता है, विकास कार्यों को गति मिलती है और सरकार अपने निर्णय स्वतंत्र रूप से ले सकती है। कुल मिलाकर, यह अवधि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है, जो चुनाव के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने और उसके बाद सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था को बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।