राज्यसभा में ‘जय हिंद’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों पर बैन, पप्पू यादव ने की सरकार की आलोचना

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
राज्यसभा के हालिया बुलेटिन में सांसदों को ‘शिष्टाचार और परंपरा’ का हवाला देते हुए ‘जय हिंद’ और ‘वंदे मातरम्’ जैसे राष्ट्रीय नारे सदन में नहीं लगाने की सलाह दिए जाने पर देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस सलाह की खुलकर आलोचना की है, वहीं बिहार के नेताओं ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है।

पप्पू यादव : ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन’
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद और नेता पप्पू यादव ने शनिवार को इस सलाह को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करार दिया। उन्होंने कहा कि यह हर नागरिक का बोलने का मौलिक अधिकार है कि वह अपनी भावनाएं व्यक्त करे।

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पप्पू यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा: “यह हर किसी का बोलने का अधिकार है, चाहे कोई ‘वंदे मातरम्’, ‘जय हिंद’, ‘वाहेगुरु’, ‘सत श्री अकाल’, या ‘हर हर महादेव’ कहे। हर किसी की अपनी आजादी है, लेकिन अगर सरकार किसी चीज को थोपे, तो वह गलत है। संविधान के तहत काम करने में किसी को कोई दिक्कत नहीं है।”

पप्पू यादव ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय नारों को संविधान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दायरे में देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक थोपे जाने के रूप में।

राष्ट्रीय नारों को राजनीतिक विमर्श से रखें दूर: JDU
इस विवाद पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रवक्ता नीरज कुमार की प्रतिक्रिया थोड़ी अलग रही। उन्होंने राष्ट्रीय नारों को राजनीतिक विमर्श का विषय बनाने पर आपत्ति जताई।

नीरज कुमार ने कहा: “राष्ट्रीय प्रतीक का नारा लगाना और उसका इस्तेमाल करना राजनीतिक विमर्श का विषय क्यों बन जाता है? निश्चित रूप से इससे बचना चाहिए। तमाम राजनीतिक दलों ने इस देश के संविधान के प्रति अपनी समर्पण व्यक्त की है। संविधान जिन प्रतीकों के इस्तेमाल की इजाजत देता है, उन पर विमर्श किया जाना और आलोचना किया जाना कहीं से उचित नहीं है।” जदयू प्रवक्ता ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे राष्ट्रीय नारों को राजनीतिक खींचतान से ऊपर रखें।

SIR पर भी पप्पू यादव ने उठाए सवाल
इस बीच, पप्पू यादव ने SIR को लेकर हो रहे विवाद पर भी चुनाव आयोग के तरीकों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई बीएलओ (BLO) की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पता चलता है कि चुनाव आयोग का तरीका गलत है। उन्होंने SIR की जांच की मांग करते हुए कहा, “SIR की जांच होनी चाहिए और इसे साइंटिफिक और ट्रांसपेरेंट तरीके से लागू किया जाना चाहिए।

बिहार में जिस तरह से गरीब और आम लोगों के वोट करने के अधिकार को छीन कर लोकतंत्र को खत्म किया गया, वैसा नहीं होना चाहिए।” कुल मिलाकर, राज्यसभा बुलेटिन में राष्ट्रीय नारों पर दी गई सलाह ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें नेताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान पर अपनी-अपनी राय रखी है।

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