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बिहार में मखाना किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। अब मखाना की कठिन हार्वेस्टिंग प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए बिहार के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है। पूर्णिया स्थित भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय ने मखाना हार्वेस्टिंग मशीन का सफल परीक्षण किया है, जो मखाना बीज निकालने का काम अब तेजी से और कम मेहनत से करेगा।
मखाना उत्पादन में बिहार देश का अग्रणी राज्य है, लेकिन इसकी खेती आज भी बहुत कठिन मानी जाती है, खासकर हार्वेस्टिंग (बुहराई) के दौरान। किसान कई घंटों तक तालाब के पानी में उतरकर मखाना निकालने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, जिससे उनके शरीर पर काफी असर पड़ता है। अब, इस चुनौती का समाधान तैयार हो गया है।
नई मशीन से बदलेंगे हालात
नई मखाना हार्वेस्टिंग मशीन खास तौर पर तालाब आधारित खेती के लिए बनाई गई है। यह बिजली से चलने वाली मशीन एक ही स्थान पर बड़ी मात्रा में मखाना बीज निकालने में सक्षम है। पारंपरिक तरीके में जहां किसानों को कई बार प्रक्रिया को दोहराना पड़ता था, वहीं इस मशीन से एक ही बार में कार्य पूरा किया जा सकता है। इससे समय, श्रम और लागत में काफी कमी आएगी।
मशीन की विशेषताएँ
यह मशीन करीब 95 किलोग्राम वजन की है, जो तालाबों और खेतों में आसानी से काम कर सकती है। मशीन को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से ले जाया जा सके। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मशीन मखाना की खेती को और अधिक सुरक्षित, तेज और प्रभावी बनाएगी।
टीम का सामूहिक प्रयास
मशीन के विकास में बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह के मार्गदर्शन में भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के विशेषज्ञों की टीम ने कड़ी मेहनत की। कृषि अभियंत्रण के डॉ. डी.के. महतो, ई. मोहन कुमार सिन्हा और उद्यान विशेषज्ञ डॉ. आशीष रंजन ने संयुक्त रूप से शोध किया, जिससे यह मशीन तैयार हो सकी। इस नवाचार के माध्यम से मखाना उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
किसानों के लिए फायदेमंद
यह मशीन न केवल श्रमिकों पर निर्भरता घटाएगी, बल्कि मखाना उत्पादन की लागत भी कम करेगी। किसानों की मेहनत कम होगी और उत्पादन की गति बढ़ेगी, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मशीन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जाती है, तो बिहार में मखाना उत्पादन में एक नई रफ्तार आ सकती है।
जल्द होगा सार्वजनिक प्रदर्शन
भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के प्रबंधन ने बताया कि इस मशीन का प्रदर्शन जल्द ही बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में किया जाएगा, और फिर इसे किसानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।