बिहार में अपराध दर में गिरावट, लेकिन महिला सुरक्षा को लेकर चिंता जारी, “अभया ब्रिगेड” की पहल

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार पुलिस मुख्यालय ने राज्य का पिछला वार्षिक आपराधिक ब्यौरा जारी किया है, जिसमें 2025 के दौरान अपराधों की गंभीर श्रेणियों में उल्लेखनीय कमी देखने को मिली है। आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में राज्य में कुल 2,556 हत्याएं, 174 डकैती और 2,502 दंगे दर्ज किए गए। पिछले वर्ष 2024 की तुलना में अपराध दर में भारी गिरावट आई है, जिसे पुलिस अपनी एक बड़ी उपलब्धि मान रही है।

पुलिस मुख्यालय द्वारा साझा किए गए डेटा के अनुसार, राज्य में संगठित अपराध और कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है। 2024 की तुलना में हत्या के मामलों में 8.3%, डकैती के मामलों में 29.9% और दंगों की घटनाओं में 21.5% की गिरावट आई है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि गश्त में वृद्धि, वैज्ञानिक अनुसंधान और अपराधियों की त्वरित गिरफ्तारी के कारण इन अपराधों में कमी आई है।

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हालांकि, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सुधार के संकेत नहीं मिल रहे हैं। 2025 में महिलाओं, बच्चियों और छात्राओं के खिलाफ दुष्कर्म की 2,025 घटनाएं सामने आईं हैं। यह आंकड़ा तब है जब बिहार पुलिस महिला सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए कई कदम उठा रही है। इस स्थिति ने पुलिस और प्रशासन के लिए महिला सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं।

इसी संदर्भ में, बिहार पुलिस ने महिला सुरक्षा के लिए एक विशेष पहल “अभया ब्रिगेड” शुरू की है। यह ब्रिगेड विशेष रूप से स्कूल और कॉलेज जाने वाली छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है। अब तक 28 जिलों में इस ब्रिगेड का गठन किया जा चुका है। प्रत्येक टीम में एक महिला पुलिस अधिकारी और तीन सिपाही होते हैं, जिनमें से दो महिला सिपाही अनिवार्य होते हैं। यह टीम संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष गश्त और निगरानी करती है।

जहां बिहार पुलिस हत्या और डकैती जैसे अपराधों को नियंत्रित करने में सफल रही है, वहीं महिलाओं के खिलाफ अपराधों की बढ़ती संख्या प्रशासन के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। पुलिस मुख्यालय का कहना है कि आने वाले समय में तकनीक और सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से इन अपराधों पर और काबू पाया जाएगा।

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