9 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेज (POCSO) एक्ट में एक ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ जोड़ने पर विचार करने का आग्रह किया। इसका मकसद किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने सच्चे रोमांटिक संबंधों को कानून के दुरुपयोग से बचाना है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुछ निर्देशों को रद्द करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने माना कि POCSO एक्ट का इस्तेमाल बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए तो किया जा रहा है, लेकिन कई बार परिवारों द्वारा इसका दुरुपयोग भी हो रहा है — खासकर तब जब लड़के-लड़की के बीच सहमति से रिश्ता होता है और परिवार विरोध करता है। कोर्ट ने अपने फैसले की कॉपी केंद्रीय कानून सचिव को भेजी है और सरकार से कहा है कि POCSO के दुरुपयोग को रोकने के लिए कदम उठाए जाएं, जिसमें रोमियो-जूलियट क्लॉज के अलावा उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी शामिल हो जो कानून का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

रोमियो-जूलियट क्लॉज क्या है?
यह क्लॉज उन देशों में लागू होता है (जैसे अमेरिका में कई राज्यों में), जहां उम्र में थोड़ा बहुत फर्क (आमतौर पर 2-4 साल) वाले किशोरों के बीच सहमति से संबंध होने पर उन्हें वैधानिक बलात्कार (statutory rape) का दोषी नहीं ठहराया जाता।
उदाहरण: अगर एक 16-17 साल का लड़का और 17-18 साल की लड़की आपसी सहमति से रिश्ते में हैं, तो POCSO के सख्त प्रावधान उन पर लागू न हों।
यह क्लॉज शेक्सपियर के नाटक ‘रोमियो एंड जूलियट’ से प्रेरित है, जिसमें दो युवा प्रेमी परिवारों के विरोध के बावजूद प्यार करते हैं।

कोर्ट ने क्या कहा?
POCSO एक्ट का दुरुपयोग एक “grim societal chasm” (समाज में गहरी खाई) पैदा कर रहा है।
1) एक तरफ गरीबी और कलंक के कारण असली पीड़ित चुप रह जाते हैं, दूसरी तरफ पढ़े-लिखे और सुविधासंपन्न लोग कानून का इस्तेमाल बदले की भावना से करते हैं।
2) कई मामलों में लड़की के परिवार द्वारा लड़के के खिलाफ POCSO के तहत केस दर्ज कराया जाता है, सिर्फ इसलिए कि वे रिश्ते के खिलाफ हैं। इससे युवा लड़के जेल में सड़ते हैं।
3) एनजीओ एनफोल्ड इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, असम, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में POCSO के कुल मामलों में से लगभग 24.3% ऐसे थे जहां किशोर आपसी सहमति से रोमांटिक रिश्ते में थे, और इनमें से 80.2% केस लड़की के माता-पिता ने दर्ज कराए थे।

भारत में सहमति की उम्र का इतिहास;
– 1940 से 2012 तक लड़कियों के लिए सहमति की उम्र 16 साल थी।
– 2012 में POCSO एक्ट लाने के साथ इसे सभी के लिए 18 साल कर दिया गया (UNCRC के अनुसार बच्चे की परिभाषा 18 साल तक)।
– अब 18 साल से कम उम्र में कोई भी यौन गतिविधि सहमति हो या न हो — वैधानिक बलात्कार मानी जाती है।