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राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा की मौत और कथित दुष्कर्म मामले में मचे बवाल के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट में पुलिस की कार्यशैली की कलई खुलने के बाद पटना एसएसपी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब यह बात सामने आई कि पुलिस ने साक्ष्यों के साथ न केवल लापरवाही बरती, बल्कि उन्हें नष्ट करने की कोशिश भी की।
अधिकारियों पर गिरी निलंबन की गाज
पटना एसएसपी कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, कदमकुआं के अपर थानाध्यक्ष (अवर निरीक्षक) हेमंत झा और चित्रगुप्तनगर की थानाध्यक्ष (अवर निरीक्षक) रोशनी कुमारी को सस्पेंड कर दिया गया है। इन दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि घटना की सूचना मिलने के बावजूद इन्होंने समय पर उचित कानूनी कार्यवाही नहीं की। इनकी इसी ढिलाई के कारण शुरुआती दौर में न तो सही साक्ष्य जुटाए जा सके और न ही मामले को सही दिशा मिल सकी।
साक्ष्यों के साथ खिलवाड़: डिटर्जेंट से धोकर सौंपी गई चादर
इस मामले में पटना पुलिस की सबसे शर्मनाक लापरवाही तब उजागर हुई जब FSL टीम ने छात्रा के कमरे से बरामद चादर की जांच की। जांच में पाया गया कि जिस चादर पर छात्रा उल्टी करने के बाद बेहोश मिली थी, उसे पुलिस ने डिटर्जेंट पाउडर से धोकर फॉरेंसिक टीम को सौंपा था। चादर पर डिटर्जेंट के अवशेष मिलना इस बात का सीधा प्रमाण है कि मौके से मिलने वाले जैविक साक्ष्यों (biological evidence) को मिटाने का प्रयास किया गया। एक तरफ छात्रा के अंतर्वस्त्रों पर मानव शुक्राणु (semen) मिलने से दुष्कर्म की पुष्टि हो रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस द्वारा चादर धोना ‘लीपापोती’ के आरोपों को सच साबित कर रहा है।
मीडिया और जनता के दबाव के बाद जागा प्रशासन
शुरुआत में पटना पुलिस ने इस मामले को बीमारी और टाइफाइड का रंग देकर रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की थी। लेकिन मीडिया की निरंतर कवरेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा के संकेतों ने पुलिस को बैकफुट पर धकेल दिया। अब गठित एसआईटी (SIT) इस बात की जांच कर रही है कि साक्ष्यों को नष्ट करने के पीछे क्या किसी रसूखदार को बचाने की साजिश थी।
पटना एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि विभागीय जांच जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, छात्रा के परिजनों का अब भी यही सवाल है कि जो साक्ष्य धो दिए गए, उनकी भरपाई कैसे होगी?