देशभर में 26 जनवरी 2026 को 77वें गणतंत्र दिवस के उत्साह से रंग-बिरंगी झांकियाँ, परेड और देशभक्ति के गीत गूंज रहे हैं। आज से ठीक 76 साल पहले, 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ था, जिसने भारत को एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य का दर्जा दिया। संविधान भले ही पूरी सभा ने मिलकर बनाया, लेकिन इसे आकार देने, लिखने और टिकाऊ बनाने का सबसे बड़ा श्रेय बाबासाहेब अंबेडकर को ही जाता है। इसलिए उन्हें “भारतीय संविधान के शिल्पकार” या “संविधान पिता” कहा जाता है।
संविधान कब और कैसे बना?
– संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी।
– संविधान तैयार करने में कुल 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे।
– इस दौरान 11 सत्रों में 165 दिनों की बैठकें हुईं, जिसमें 114 दिन मसौदे पर विस्तृत चर्चा के लिए समर्पित थे।
– हर अनुच्छेद पर गहन बहस और विचार-विमर्श के बाद, 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने इसे औपचारिक रूप से अपनाया और स्वीकार किया।
संविधान को लागू करने के लिए 26 जनवरी ही क्यों चुना गया?
संविधान 26 नवंबर 1949 को तैयार हो चुका था, लेकिन इसे लागू करने के लिए लगभग 2 महीने का इंतजार किया गया। इसके पीछे गहरा ऐतिहासिक कारण है:
-26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज (पूर्ण स्वतंत्रता) की ऐतिहासिक घोषणा की थी। इस अधिवेशन की अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। कांग्रेस ने फैसला लिया कि हर साल जनवरी के अंतिम रविवार को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा – और 1930 में यह तारीख 26 जनवरी ही थी। स्वतंत्रता के बाद संविधान निर्माताओं ने सोचा कि जिस दिन देश ने पूर्ण स्वतंत्रता का संकल्प लिया था, उसी दिन अपना संविधान लागू करना सबसे उपयुक्त होगा। इस तरह 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और भारत एक गणराज्य बन गया।
डॉ. बी.आर. अंबेडकर – संविधान के मुख्य शिल्पकार
डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर को भारतीय संविधान का प्रमुख निर्माता कहा जाता है। वे ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्यक्ष थे।
उन्होंने दुनिया के कई संविधानों का गहन अध्ययन किया और भारत की जरूरतों के अनुरूप एक व्यावहारिक, लोकतांत्रिक और समावेशी संविधान तैयार किया।
मौलिक अधिकार, समानता, सामाजिक न्याय, अस्पृश्यता का उन्मूलन जैसी महत्वपूर्ण बातों को संविधान में मजबूती से शामिल किया।
संविधान सभा की बहसों में उन्होंने कानूनी तर्कों और दूरदर्शिता से संविधान की रक्षा की।