अरिजीत सिंह के संन्यास की चर्चा: क्या होता है ‘प्लेबैक सिंगिंग’ और क्यों इसके बिना अधूरा है बॉलीवुड?…

Ritu Raj

अपनी मखमली आवाज़ से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले बॉलीवुड के ‘किंग ऑफ मेलोडी’ अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग को अलविदा कहकर फिल्म इंडस्ट्री और अपने प्रशंसकों को गहरा सदमा दिया है। एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वे फिल्मों के लिए पार्श्व गायन (Playback Singing) नहीं करेंगे, बल्कि अपना पूरा ध्यान स्वतंत्र संगीत (Independent Music) और रचनात्मक प्रयोगों पर केंद्रित करेंगे।

फैंस में छाई मायूसी;
“तुम ही हो” से लेकर “चन्ना मेरेया” तक, अरिजीत की आवाज़ पिछले एक दशक से बॉलीवुड की रूह रही है। उनके इस फैसले ने उन लाखों प्रशंसकों को उदास कर दिया है जो हर बड़ी फिल्म में उनकी आवाज़ का इंतज़ार करते थे। हालांकि, अरिजीत ने राहत देते हुए कहा कि वे संगीत से दूर नहीं जा रहे, बस उनका माध्यम बदल रहा है।

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क्या होती है ‘प्लेबैक सिंगिंग’?
परिभाषा: प्लेबैक सिंगिंग वह तकनीक है जिसमें गायक पहले स्टूडियो में गाना रिकॉर्ड करता है। बाद में, फिल्म की शूटिंग के दौरान अभिनेता या अभिनेत्री उस रिकॉर्डेड आवाज़ पर केवल लिप-सिंकिंग (होंठ हिलाना) और अभिनय करते हैं।
इतिहास: भारतीय सिनेमा की शुरुआत में कलाकार खुद गाते थे, लेकिन तकनीकी विकास और गायन कौशल की कमी के कारण प्रशिक्षित गायकों की ज़रूरत महसूस हुई।
महत्व: प्लेबैक सिंगर्स किसी भी फिल्म की सफलता की रीढ़ होते हैं। लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी और किशोर कुमार जैसे दिग्गजों ने अपनी आवाज़ से परदे पर दिखने वाले सितारों को ‘अमर’ बना दिया।

अरिजीत सिंह: आधुनिक दौर के ‘वॉइस ऑफ बॉलीवुड’
अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग को एक नई ऊंचाई दी। उन्होंने साबित किया कि एक गायक की आवाज़ किसी सुपरस्टार से कम प्रभावशाली नहीं होती। उनके संन्यास के फैसले का मतलब है कि अब फिल्मों में उनकी आवाज़ की वह कशिश सुनने को नहीं मिलेगी जो किरदारों के दर्द और प्यार को जीवंत कर देती थी।

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