बिहार विधानसभा: गलत जवाब देने पर नपेंगे अधिकारी, प्रभारी मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने सदन में माना—अधिकारी कर रहे गुमराह

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा सत्र के चौथे दिन सदन में उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी (प्रमोद कुमार) अपनी ही विभाग के अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए जवाबों के कारण सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच घिर गए। अधिकारियों द्वारा जमीन हकीकत से परे डेटा पेश करने पर मंत्री को सदन में बैकफुट पर आना पड़ा और उन्होंने दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

पलाशी पीएचसी पर छिड़ी रार
प्रश्नोत्तर काल के दौरान एआईएमआईएम (AIMIM) विधायक मुर्शिद आलम ने अररिया के पलाशी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की बदहाली का मुद्दा उठाया। प्रभारी मंत्री ने विभागीय जानकारी के आधार पर दावा किया कि इस केंद्र को उत्क्रमित (Upgrade) कर 30 बेड का अस्पताल बना दिया गया है।

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इस पर विधायक मुर्शिद आलम सदन में ही बिफर गए। उन्होंने मंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि अधिकारी सदन को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं खुद स्थानीय लोगों के साथ वहां गया था, वह आज भी केवल 6 बेड का अस्पताल है। अगर इजाजत मिले तो मैं सदन में इसकी तस्वीरें भी दिखा सकता हूं।” विपक्ष के भारी विरोध को देखते हुए मंत्री ने आश्वासन दिया कि वे इस मामले की व्यक्तिगत जांच कराएंगे और गलत तथ्य देने वाले अफसरों को दंडित करेंगे।

पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा ने भी घेरा
केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा ने भी स्वास्थ्य विभाग के मानकों पर सवालिया निशान लगा दिए। उन्होंने पूछा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के मानक क्या हैं? मिश्रा ने बताया कि लखनौर में 5 करोड़ की लागत से 20 बेड का अतिरिक्त भवन बना, उद्घाटन भी हुआ, लेकिन वह डेढ़ साल से बंद है।

नीतीश मिश्रा ने विभाग की पोल खोलते हुए कहा कि वहां 16 नर्सों की बहाली हुई लेकिन मौके पर एक भी नहीं है। डॉक्टरों की कमी ऐसी है कि प्रभारी को दो-दो केंद्रों का जिम्मा संभालना पड़ रहा है। इस पर मंत्री ने बचाव करते हुए कहा कि वर्ष 2025 में नए पद सृजित किए गए हैं और जल्द ही नियुक्तियां पूरी कर ली जाएंगी।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायकों को शांत कराया और सरकार को निर्देश दिया कि जांच के समय संबंधित विधायकों को भी शामिल किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

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