विपक्ष की ओर से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस मंगलवार को लोकसभा महासचिव को सौंप दिया गया है। यह कदम कांग्रेस की अगुवाई में उठाया गया, जिसमें विपक्ष के नेता के. सुरेश और कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने मुख्य भूमिका निभाई।
सूत्रों के अनुसार, इस नोटिस पर लगभग 118 से 119 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिसमें कांग्रेस, सपा, डीएमके, वाम दल और आरजेडी जैसे विपक्षी दल शामिल हैं। कांग्रेस सांसद गौराव गोगोई ने पुष्टि की कि दोपहर 1:14 बजे नियम 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया गया। पार्टी का दावा है कि इतनी बड़ी संख्या में समर्थन विपक्ष की एकजुटता और स्पीकर पर लगे पक्षपात के आरोपों की गंभीरता को दिखाता है। विपक्ष का मुख्य आरोप है कि लोकसभा की कार्यवाही में पक्षपात हो रहा है। विपक्षी सांसदों को बोलने का उचित समय नहीं मिल रहा, और सदन में बार-बार व्यवधान पैदा किए जा रहे हैं। कांग्रेस ने इन मुद्दों को इस प्रस्ताव के माध्यम से उजागर किया है। हालांकि, इस प्रस्ताव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने हिस्सा नहीं लिया। टीएमसी ने स्पष्ट रूप से हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और खुद को इससे अलग रखा। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी ने कांग्रेस को पहले इंडिया गठबंधन की मांगों को लेकर स्पीकर से अपील करने का सुझाव दिया था। स्पीकर को इन अपीलों पर जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। यदि स्पीकर विपक्ष की मांगों पर सहमत नहीं होते, तो टीएमसी आगे विचार करेगी।
एक दिलचस्प बात यह है कि राहुल गांधी ने इस अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए। कांग्रेस का तर्क है कि संसदीय परंपराओं और मर्यादा को बनाए रखते हुए विपक्ष के नेता का स्पीकर के खिलाफ ऐसे प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं होगा। फिर भी, पार्टी ने सदन के कामकाज से जुड़ी अपनी गंभीर चिंताओं को इस नोटिस के जरिए मजबूती से रखा है। हालांकि, यह घटना बजट सत्र के दौरान लोकसभा में जारी हंगामे और टकराव को और तेज कर सकती है।