पटना यूनिवर्सिटी का ‘अनाड़ी’ कारनामा: छात्र के एडमिट कार्ड पर लगाई लड़की की फोटो, ‘अंसारी’ को बना दिया ‘अनाड़ी’

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार पटना विश्वविद्यालय (PU) अपनी एक भयंकर लापरवाही को लेकर सुर्खियों में है। विश्वविद्यालय ने एमए उर्दू के एक छात्र के एडमिट कार्ड के साथ ऐसा ‘मजाक’ किया है कि छात्र अब परीक्षा देने के बजाय सिस्टम की चौखट पर न्याय की गुहार लगा रहा है। मामला छात्र जाबिर अंसारी का है, जिनके एडमिट कार्ड पर विश्वविद्यालय ने न केवल उनकी जगह एक लड़की की तस्वीर चिपका दी, बल्कि उनके नाम के साथ छेड़छाड़ करते हुए उसे ‘जाबिर अनाड़ी’ कर दिया।

परीक्षा से महज 24 घंटे पहले उड़ा होश
जाबिर अंसारी एमए उर्दू के छात्र हैं और गुरुवार से उनकी परीक्षाएं शुरू होनी हैं। बुधवार को जब वे अपना एडमिट कार्ड लेने पहुंचे, तो उसे देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। एडमिट कार्ड पर फोटो किसी अजनबी लड़की की थी और उपनाम (Surname) बदलकर ‘अनाड़ी’ कर दिया गया था। विडंबना यह है कि जब छात्र इस त्रुटि को सुधारने के लिए अधिकारियों के पास पहुँचा, तो मदद के बजाय उसे ही दोषी ठहराने की कोशिश की गई।

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करियर पर मंडराया कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर
जाबिर ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि परीक्षा केंद्र (साइंस कॉलेज) पर पहचान पत्र और एडमिट कार्ड की फोटो मैच न होने की स्थिति में उन्हें ‘फर्जी परीक्षार्थी’ (Impersonator) माना जा सकता है। छात्र को डर है कि अगर वह इस एडमिट कार्ड के साथ परीक्षा देने जाता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है या उसे गिरफ्तार भी किया जा सकता है। एक होनहार छात्र के लिए यह स्थिति किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है।

दफ्तर-दफ्तर भटक रहा छात्र, अधिकारी झाड़ रहे पल्ला
हैरानी की बात यह है कि रजिस्ट्रार से लेकर एग्जामिनेशन कंट्रोलर तक, कोई भी इस गलती की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। छात्र दिन भर विश्वविद्यालय के गलियारों में भटकता रहा, लेकिन उसे केवल आश्वासन ही मिले। अधिकारियों का तर्क है कि छात्र ने खुद ऐसी फोटो अपलोड की होगी, जबकि छात्र का कहना है कि यह पूरी तरह सिस्टम और कंप्यूटर ऑपरेटर की विफलता है।

सिस्टम की साख पर सवाल
यह घटना केवल एक टाइपिंग मिस्टेक नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि विश्वविद्यालय में संवेदनशील दस्तावेजों की क्रॉस-चेकिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। एक छात्र का पूरा साल बर्बाद होने की कगार पर है, और विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी गरिमा को ताक पर रखकर मूकदर्शक बना हुआ है। अब सबकी निगाहें गुरुवार को होने वाली परीक्षा पर टिकी हैं कि क्या जाबिर को इंसाफ मिलेगा या ‘सिस्टम की लापरवाही’ उनकी मेहनत पर पानी फेर देगी।

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