बिहार की राजनीति में इन दिनों एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच अब उनके बेटे निशांत कुमार को सूबे की कमान सौंपने की तैयारी तेज हो गई है। जेडीयू (JDU) के भीतर ‘टीम निशांत’ सक्रिय हो चुकी है और सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक उनके नाम के नारे गूँज रहे हैं।

हाल ही में बेगूसराय दौरे के दौरान नीतीश कुमार का स्वागत ‘निशांत कुमार’ के नारों से हुआ। जब समर्थकों ने उन्हें भावी मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया, तो नीतीश कुमार के चेहरे की मुस्कान और हाथ जोड़कर अभिवादन ने इन कयासों को और हवा दे दी। जेडीयू के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स भी अब निशांत की छवि चमकाने में जुट गए हैं। पार्टी के भीतर 24 से अधिक विधायकों ने एक गुप्त बैठक की है, जिसमें निशांत कुमार को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने का रोडमैप तैयार किया गया है। इस आगामी विधायक दल की बैठक में निशांत कुमार का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया जाएगा। वे किन जिलों का दौरा करेंगे और किन मुद्दों पर जनता के बीच जाएंगे, इसका पूरा खाका तैयार कर लिया गया है।

विधायकों का खुला समर्थन;
चेतन आनंद: उन्होंने स्पष्ट किया कि युवा चाहते हैं कि बिहार का नेतृत्व निशांत संभालें। उन्होंने नीतीश कुमार के ‘बेदाग’ छवि का हवाला देते हुए निशांत को सबसे उपयुक्त उत्तराधिकारी बताया।
विशाल कुमार: इनका मानना है कि निशांत के आने से कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा है और वे अगले 25-30 सालों तक विकास की गति को बनाए रख सकते हैं।
शुभानंद मुकेश: उन्होंने कहा कि नीतीश जी का राज्यसभा जाना भावुक क्षण है, लेकिन निशांत का नेतृत्व पार्टी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

‘परिवारवाद’ बनाम ‘संघर्षवाद’;
विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे परिवारवाद के आरोपों पर जेडीयू विधायकों का अपना तर्क है। उनका कहना है कि यह ‘परिवारवाद’ नहीं बल्कि ‘संघर्षवाद’ है। उनके अनुसार, निशांत को जनता पर थोपा नहीं जा रहा, बल्कि वे अपने पिता की साफ-सुथरी राजनीति और नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए खुद आगे आए हैं।