बिहार बिजली उपभोक्ताओं की मौज: मीटर बदलने या नया कनेक्शन मिलने की समय-सीमा तय, जानें नए नियम!..

Ritu Raj

बिहार में बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। करीब 19 साल बाद ‘बिजली आपूर्ति संहिता’ में बदलाव करते हुए अब अधिकारियों की जवाबदेही सीधे तय कर दी गई है। इस नई व्यवस्था के तहत यदि कोई अधिकारी समय पर सेवा देने में लापरवाही करता है, तो उसे हर दिन ₹1,000 का जुर्माना अपनी जेब से भरना पड़ेगा।

दरअसल, यह कदम लंबे समय से चली आ रही उस समस्या को खत्म करने के लिए उठाया गया है, जिसमें आम लोगों को बिजली कनेक्शन या मीटर बदलवाने के लिए महीनों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब सरकार ने इन सेवाओं को पूरी तरह समयबद्ध कर दिया है, ताकि लोगों को तेज और पारदर्शी सेवा मिल सके। नए नियमों के मुताबिक, अलग-अलग क्षेत्रों के लिए समय सीमा तय की गई है। नगर निगम वाले बड़े शहरों में नया बिजली कनेक्शन सिर्फ 3 दिनों के भीतर देना होगा। अन्य शहरी क्षेत्रों और टाउनशिप में यह सीमा 7 दिन रखी गई है, जबकि ग्रामीण इलाकों में अधिकतम 15 दिनों के भीतर कनेक्शन देना अनिवार्य होगा। यह समय सीमा स्थानीय बुनियादी ढांचे को ध्यान में रखते हुए तय की गई है। इस फैसले की जानकारी Janata Dal (United) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए साझा की। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़े और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो। सबसे अहम बात यह है कि जुर्माना विभाग नहीं, बल्कि सीधे संबंधित अधिकारी के वेतन या निजी फंड से काटा जाएगा। इससे काम में ढिलाई बरतने वालों पर सीधा दबाव बनेगा।

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कानूनी तौर पर भी इस नियम को सख्ती से लागू किया गया है। जैसे ही तय समय-सीमा खत्म होती है, अगले ही दिन से जुर्माना लगना शुरू हो जाएगा। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी शहर में 3 दिन की समय सीमा है और चौथे दिन तक कनेक्शन नहीं दिया गया, तो उसी दिन से ₹1,000 प्रतिदिन का जुर्माना लागू हो जाएगा। यह नियम सिर्फ नए कनेक्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि खराब मीटर बदलने और अन्य तकनीकी सेवाओं में देरी पर भी लागू होगा। दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से बिहार में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान होगी और ‘ईज ऑफ लिविंग’ बेहतर होगा। साथ ही, बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। अगर यह मॉडल सफल होता है, तो आने वाले समय में दूसरे राज्य भी इसे अपनाने पर विचार कर सकते हैं।

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