सिटी पोस्ट लाइव : साल 2005 में सत्ता में आने के बाद नीतीश कुमार ने CM बनते ही लालू के करीबियों पर कार्रवाई शुरू कर दी. नवादा में पहाड़ के पत्थरों के खनन का ठेका भी एक बाहर की कंपनी को दे दिया गया.लेकिन नवादा में लालू के करीबी राजबल्लभ यादव के सामने किसी की नहीं चली.राजबल्लभ ने कंपनी के ट्रकों पर टैक्स लगा दिया. तंग होकर कंपनी ठेका छोड़कर भाग गई. राजबल्लभ यादव को नीतीश कुमार झुका नहीं पाए. लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि क्या राजबल्लभ और RJD का 33 साल पुराना रिश्ता टूट चुका है.
22 अगस्त, 2025 को बोधगया में PM मोदी ने 12,431 करोड़ के प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया. इस दौरान उनकी रैली में पूर्व मंत्री राजबल्लभ यादव की पत्नी नवादा से RJD की विधायक विभा देवी भी मंच पर नजर आईं.साल 2005 में सत्ता में आने के बाद नीतीश कुमार ने CM बनते ही लालू के करीबियों पर कार्रवाई शुरू कर दी. नवादा में पहाड़ के पत्थरों के खनन का ठेका भी एक बाहर की कंपनी को दे दिया गया.लेकिन नवादा में लालू के करीबी राजबल्लभ यादव के सामने किसी की नहीं चली.राजबल्लभ ने कंपनी के ट्रकों पर टैक्स लगा दिया. तंग होकर कंपनी ठेका छोड़कर भाग गई. राजबल्लभ यादव को नीतीश कुमार झुका नहीं पाए.
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले राजबल्लभ को हाईकोर्ट से रिहाई मिल गई. माना जा रहा है कि इस रिहाई के पीछे नीतीश की सियासी चाल हो सकती है. ऐसी खबर भी थी कि मंच से ही विभा देवी BJP में शामिल होंगी, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ. ये नवादा की परंपरा रही है कि एक विधायक एक चुनाव में एक पार्टी में रहता है और दूसरे चुनाव में दूसरी पार्टी में चला जाता है. यहां तो मंत्री तक पाला बदल रहे हैं.’’नवादा की पॉलिटिक्स में राजबल्लभ यादव मजबूत खिलाड़ी हैं. अब 9 साल बाद वे जेल से बाहर आ गए हैं. वे कभी BJP के साथ नहीं रहे. नवादा का जातीय समीकरण राजबल्लभ के पक्ष में रहा है. यहां यादव, भूमिहार और वैश्य बड़ा फैक्टर है. ये पहले भी उनके साथ रहे हैं.‘ 1990 के बाद ये पहली बार होगा कि यहां BJP की तरफ से यादव कैंडिडेट होगा.’
नवादा और गोविंदपुर यादवों के गढ़ माने जाते हैं. गोविंदपुर में कौशल यादव के पिता युगल यादव का दबदबा था. कौशल यादव ने पूरे नवादा में वर्चस्व कायम करने की कोशिश की. 2010 और 2015 में नवादा की चार सीट नवादा, गोविंदपुर, वारिसलीगंज और हिसुआ में अपने लोगों को जिताने में कामयाब रहे.लेकिन ‘मौजूदा समय में न तो कौशल यादव विधायक हैं और ना ही उनके परिवार से कोई विधायक है. कौशल यादव नीतीश कुमार के साथ आ चुके हैं.अब ये देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि वो राजबल्लभ यादव पर नवादा और गोविंदपुर में कितना भारी पड़ेगे.
नवादा के अलावा गोविंदपुर और रजौली सीट पर यादव वोट हार-जीत तय करते हैं. रजौली में यादव RJD को वोट करते हैं. यहां से प्रकाश वीर RJD के टिकट पर लगातार दो बार से जीत रहे हैं. प्रकाश वीर चौधरी (पासी) कम्युनिटी से आते हैं. उनका कहना है कि राजबल्लभ जी का आदेश होगा तो अभी उनके साथ हो जायेगें. ‘इस इलाके में सवर्ण पहले से BJP के साथ हैं. पार्टी राजबल्लभ के सहारे OBC और दलित को अपने पाले में लाने की कोशिश कर सकती है.राजबल्लभ यादव की अपनी जाति के लोगों के बीच अच्छी पकड़ है. उनका अपना पत्थर का कारोबार है. इसलिए हर बिरादरी में उनकी पैठ है.
नवादा विधानसभा सीट पर करीब 70 हजार सवर्ण वोटर हैं. यादव वोटर करीब 55 हजार हैं. गोविंदपुर सीट पर यादवों के 80 हजार वोट हैं. मुस्लिमों के 50 हजार वोट भी हार-जीत में बड़ा फैक्टर हैं. इनके अलावा कुशवाहा के 28 हजार, भूमिहार के 20 हजार वोट हैं. पिछड़ा वर्ग और SC-ST के वोट भी करीब 50 हजार हैं.रजौली विधानसभा में SC-ST कम्युनिटी के करीब 97 हजार वोट हैं. इनके अलावा यहां अति पिछड़ा और यादव के लगभग 1 लाख वोट हैं. सवर्ण वोटर्स करीब 30 हजार हैं. वहीं वैश्य और मुस्लिम वोटर्स की आबादी यहां लगभग 20-20 हजार हैं.
साल 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा तोड़ने का असर देश के साथ बिहार पर भी दिखा. बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू करने की बातें हो रही थीं. लालू प्रसाद यादव नए-नए मुख्यमंत्री बने थे. उन्होंने विधानसभा का स्पेशल सेशन बुलाया और बहुमत साबित करने का फैसला लिया.सरकार खतरे में थी, इसे बचाने के लिए लालू को कुछ विधायक चाहिए थे. तब उनकी मदद के लिए कृष्णा यादव सामने आए. वे पहली बार BJP के टिकट पर नवादा से चुनाव जीते थे. उन्होंने BJP के विधायक तोड़कर लालू की मदद की. BJP के पास 39 विधायक थे. उसके विधायक तोड़ने वाले कृष्णा यादव राजबल्लभ यादव के बड़े भाई थे.
1990 के दशक से आज तक नवादा की सियासत में दो ही नेताओं का दबदबा रहा. पहले राजबल्लभ यादव और दूसरे कौशल यादव. दोनों को सियासत विरासत में मिली. माइनिंग के बड़े कारोबारी रहे राजबल्लभ पॉलिटिक्स से दूर अपना बिजनेस चला रहे थे.राजनीति में उनकी एंट्री 1995 में हुई, जब 1994 में बड़े भाई कृष्णा यादव का निधन हो गया. उम्मीद थी कि कृष्णा यादव की जगह लालू यादव राजबल्लभ को देंगे, लेकिन लालू ने चंद्रभूषण यादव को टिकट दे दिया.राजबल्लभ यादव निर्दलीय मैदान में उतर गए. पहले ही चुनाव में जीते और मैसेज दे दिया कि नवादा के असली खिलाड़ी वही हैं. हालांकि निर्दलीय जीतने के बाद वे विधानसभा में लालू के साथ रहे. 2000 में लालू ने उन्हें RJD के तरफ से टिकट दिया और राजबल्लभ चुनाव जीत गए. लालू ने उन्हें श्रम राज्य मंत्री बनाया.
नवादा के बगल की सीट गोविंदपुर पर 1970 से राज करने वाले कौशल यादव नवादा सीट पर कब्जा करना चाहते थे. 2005 में वे इसमें कामयाब हुए. उन्होंने पत्नी पूर्णिमा यादव को यहां से निर्दलीय चुनाव लड़वाया. पूर्णिमा यादव ने राजबल्लभ यादव को चुनाव में हरा दिया. राजबल्लभ तब मंत्री थे.इसके बाद 2010 में कौशल यादव JDU में शामिल हो गए. उन्होंने गोविंदपुर से चुनाव लड़ा और पत्नी को नवादा से टिकट दिलाया. नवादा में एक बार फिर सामने राजबल्लभ थे. कौशल यादव और उनकी पत्नी दोनों सीट जीत गए.2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार महागठबंधन में आ गए. इसका असर नवादा में भी हुआ. धुर विरोधी राजबल्लभ और कौशल यादव भी साथ हो गए. नवादा से राजबल्लभ लड़े, तो गोविंदपुर सीट कौशल यादव के हिस्से में आई. यहां से उन्होंने पत्नी पूर्णिमा यादव को चुनाव लड़वाया. 10 साल बाद विधानसभा में राजबल्लभ की वापसी हुई. गोविंदपुर से पूर्णिमा यादव भी चुनाव जीत गईं.
2018 में राजबल्लभ यादव को नाबालिग से रेप केस में उम्रकैद की सजा हो गई और विधानसभा से उनकी सदस्यता खत्म हो गई. 2019 में उपचुनाव हुआ. RJD ने राजबल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी को मैदान में उतारा. कौशल यादव एक बार फिर से राजबल्लभ यादव के परिवार को पटखनी देने में कामयाब रहे. हालांकि 2020 के चुनाव में विभा देवी RJD के टिकट पर चुनाव जीत गईं. कौशल यादव तीसरे नंबर पर रहे. इसके बाद वे नवादा की राजनीति से गायब हो गए.2022 में विधान परिषद के चुनाव में तेजस्वी ने श्रवण कुशवाहा को कैंडिडेट बना दिया. राजबल्लभ ने भतीजे और कृष्णा यादव के बेटे अशोक यादव को निर्दलीय उतार दिया. अशोक यादव चुनाव जीत गए. MLC चुनाव के बाद राजबल्लभ 2024 के लोकसभा चुनाव में तेजस्वी ने MLC चुनाव में हारे श्रवण कुशवाहा को कैंडिडेट बना दिया.राजबल्लभ यादव ने अपने भाई विनोद यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया. श्रवण कुशवाहा 67 हजार वोट से ये चुनाव हार गए. यहां से BJP के विवेक ठाकुर चुनाव जीत गये.