बिहार चुनाव से पहले PM मोदी का ट्रंप कार्ड, CM नीतीश की अहम् भूमिका.

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सिटी पोस्ट लाइव :विपक्ष भले नीतीश कुमार  की सेहत पर सवाल उठाये एकबार फिर नीतीश कुमार ने देश भर में  जिस तरह से जातीय जनगणना कराने का फैसला केंद्र सरकार से करवा कर  ये साबित कर दिया है कि राजनीति में उनको मात देना अभी भी आसान नहीं है. जातीय जनगणना कराने के केंद्र सरकार के निर्णय के पीछे नीतीश कुमार की अहम् भूमिका मानी जा रही है.बिहार चुनाव से पहले मोदी और नीतीश कुमार के इस ट्रम्प कार्ड से राहुल-तेजस्वी और अखिलेश सन्न हैं.अब आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव कह रहे हैं कि उनके कहने पर 1996-97 में संयुक्त मोर्चा की केंद्र सरकार ने जाति आधारित गणना कराने का निर्णय लिया था. बाद के वर्षों में एनडीए की सरकार ने इसे लागू नहीं किया.

लालू जी जो भी दावा करें  लेकिन, जाति आधारित गणना के लिए चले हाल के अभियान का श्रेय नीतीश कुमार को ही जाता है. नीतीश ने राज्य में इसके लिए वातावरण बनाया. सर्वदलीय बैठक बुलाई.सभी दलों को तर्कों के आधार पर सहमत कराया. सबकी सहमति मिलने के बाद मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य के सभी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला.प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेताओं ने मीडिया को बताया कि केंद्र सरकार जाति आधारित गणना के लिए सिद्धांत रूप से तो सहमत है. लेकिन, अभी वह इसके लिए राजी नहीं है.राज्य सरकार चाहे तो अपने साधनों के बल पर जाति आधारित गणना करा सकती है.

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मुख्यमंत्री ने बिहार में जाति आधारित गणना करवा दी. उसके आंकड़े के आधार पर सरकारी सेवाओं में आरक्षण का दायरा 65 प्रतिशत तक बढ़ा दिया.सर्वोच्च न्यायालय की रोक के कारण बढ़े हुए आरक्षण का लाभ राज्य के लोगों को नहीं मिल रहा है. लेकिन, गणना के अन्य आंकड़े पर राज्य सरकार काम कर रही है.गणना से पता चला कि राज्य में अत्यंत गरीब परिवारों की संख्या 94 लाख है. राज्य सरकार ने इन परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दो लाख रुपये देने का निर्णय लिया.हालांकि अभीतक  इसका कार्यान्वयन हो पाया है.

नीतीश कुमार जब विरोधी दलों के गठबंधन में शामिल हुए थे.तय हुआ कि 2024 के चुनाव में अगर विरोधी दलों के गठबंधन आइएनडीआइए को सरकार बनाने का अवसर मिलता है तो न्यूनतम साझा कार्यक्रम में देश व्यापी जाति आधारित गणना को सूची में पहले स्थान पर रखा जाए. बैठक में नीतीश कुमार के इस प्रस्ताव का कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुला विरोध किया था.लेकिन आज  राहुल गांधी ही आज सबसे आगे बढ़ कर इसका श्रेय ले रहे हैं.

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