सिटी पोस्ट लाइव : आज पटना के श्रीकृष्ण स्मारक भवन में आयोजित जगलाल चौधारी के जयंती समारोह में भाग लेने आये राहुल गांधी जगलाल चौधरी का नाम ही भूल गये.लोगों ने उन्हें गलत नाम लेने पर टोका फिर वो संभले.जगलाल चौधरी के जयंती पर जगलाल चौधरी की बात कम हुई दलित-पिछड़ों की राजनीति ज्यादा हुई.राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर दलितों-पिछड़ों-आदिवासियों की राजनीतिक और सरकारी नौकरियों में मिल रही कम भागेदारी को लेकर सवाल उठाया.उन्होंने कहा कि दलितों-पिछड़ों और आदिवासियों को उनकी आबादी के हिसाब से न तो सत्ता-शासन में उचित भागेदारी मिली है और ना ही राजनीति में.
राहुल गांधी ने अमेरिकन विश्विद्यालयों में नामांकन के लिए होनेवाले टेस्ट एग्जाम में गोरों- और कालों के बीच किये जानेवाले भेदभाव की खानाए सुनाई.उन्होंने कहा कि परीक्षा के सवाल ही ऐसे पैटर्न पर सेट थे कि केवल गोर ही पास होते थे.लेकिन जब एक अफ्रीकन ब्लैक ने परीक्षा का सवाल सेट किया तो सारे गोर फेल हो गये.उन्होंने अपने देश की शिक्षा व्यवस्था पर इस कहानी के जरिये चोट की.इस कार्यक्रम की ख़ास बात ये थी कि कांग्रेस के प्रदेश अखिलेश प्रसाद सिंह को बोलने का मौका ही नहीं दिया गया.राहुल गांधी के बगल की कुर्सी भी उन्हें नहीं मिली.राहुल गांधी के दाहिने कार्यक्रम के आयोजक विनोद चधारी बैठे तो बाएं तरफ बिहार चुनाव के प्रभारी .
प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर अखिलेश की जानकारी के वगैर राहुल गांधी का पटना में दूसरा कार्यक्रम तय कराने में अहम् भूमिका निभानेवाले राहुल गांधी के करीबी बिहार चुनाव के सह-प्रभारी सुशील पासी ने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि कार्यक्रम का पूरा फायदा आयोजक और पासी समाज से आनेवाले विनोद चौधरी को मिले.पहले राहुल गांधी की बगलवाली कुर्सी पर अखिलेश सिंह ही बैठे थे लेकिन राहुल गांधी ने कुछ ऐसा किया कि अखिलेश सिंह की कुर्सी बदल गई.सुशील पासी ने विनोद चौधरी और बिहार चुनाव के प्रभारी को राहुल गांधी के दायें-बाएं बिठा दिया.
दरअसल, डॉक्टर अखिलेश प्रसाद सिंह के खिलाफ पार्टी के कुछ नेता गोलबंद हैं.कुछ खुलकर उनका विरोध कर रहे हैं तो कुछ उनके विरोधियों का चोरी चुप्पे साथ दे रहे हैं.अखिलेश प्रसाद को अलग थलग दिखाने की कोशिश के तहत ही राहुल गांधी का दो कार्यक्रम वगैर प्रदेश अध्यक्ष की जानकारी के पटना में तय हो गये.पिछलीबार तो किसी तरह से अखिलेश सिंह राहुल गांधी को सदाकत आश्रम ले जाकर अपनी प्रतिष्ठा बचाने में कामयाब रहे लेकिन इसबार तो उन्हें मौका ही नहीं मिला.आखिरी क्षण में उन्हें राहुल गांधी के कार्यक्रम के बारे में जानकारी मिली इसलिए वो पार्टी का कोई कार्यक्रम तय नहीं कर पाए या फिर राहुल गांधी ने समय नहीं दिया.
सूत्रों के अनुसार अखिलेश की मुखालफत कर रहे नेताओं को बिहार प्रदेश के चुनाव प्रभारी बने केन्द्रीय नेताओं का साथ भी मिल रहा है.सभी प्रभारी अखिलेश सिंह को कमजोर करने में जुटे हैं.राहुल गांधी का दो निजी कार्यक्रमों में आने का कार्यक्रम उन्होंने ही मिलकर बना दिया.अखिलेश प्रसाद सिंह पार्टी संगठन के गठन करना चाहते हैं.उन्होंने बहुत पहले अपने पसंदीदा नेताओं के नाम की सूची आलाकमान के पास भेंज दी है.लेकिन आजतक उसके ऊपर कोई फैसला नहीं हो पाया.कांग्रेस पार्टी वगैर पार्टी पदाधिकारियों के पिछले 6 साल से चल रही है.