8 विधायक़ छोड़ चुके हैं पार्टी, तेजस्वी यादव के लिए कितनी बड़ी है चुनावी चुनौती?

City Post Live

सिटी पोस्ट लाइव : विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं के पाला बदलने का खेल शुरू हो गया है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 8 विधायक पार्टी से किनारा कर चुके हैं. बाहुबली आनंद मोहन के बेटे, अनंत सिंह की पत्नी से लेकर आठ विधायक अभीतक पार्टी छोड़ चुके हैं. तेज प्रताप यादव परिवार की इमेज को डैमेज कर रहे हैं तो बाहुबली अनंत सिंह, राजबल्लभ यादव,प्रहलाद यादव आनंद मोहन, रामा सिंह अपने-अपने एरिया में चुनौती दे रहे हैं.विधायकों के बगावत से RJD को फायदा या नुकसान? बागी विधायकों की राजनीतिक ताकत क्या है?

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

22 अगस्त को गयाजी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंच पर नवादा से RJD विधायक विभा देवी दिखीं. चर्चा है कि वह 2025 का विधानसभा चुनाव RJD के टिकट पर नहीं लड़ेंगी. वैसे आधिकारिक तौर पर उन्होंने अब तक पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है.2020 विधानसभा चुनाव में लालू यादव के खास रहे बाहुबली राजबल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी ने निर्दलीय श्रवण कुमार को हराया था. तीसरे स्थान पर JDU के कौशल यादव थे.कौशल यादव RJD में शामिल हुए हैं. इसके बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि विभा का रास्ता अलग हो सकता है. दरअसल, नवादा की राजनीति में कौशल यादव और राज बल्लभ यादव एक-दूसरे के विरोधी हैं.

राजबल्लभ यादव परिवार 1990 से ही नवादा में एक शक्ति का केंद्र रहा है. उनके बड़े भाई कृष्णा यादव भी विधायक रहे. इस परिवार का नवादा के आसपास के विधानसभा सीटों पर भी असर है.राज बल्लभ 1995 में पहली बार निर्दलीय विधायक चुने गए थे. 2000 में RJD के टिकट पर चुनाव जीते तो श्रम मंत्री बनाए गए थे.इसके बाद 2015 में JDU-RJD और कांग्रेस के महागठबंधन से राजबल्लभ एक बार फिर चुनाव जीते, लेकिन फरवरी 2016 में नाबालिग से रेप मामले में उन पर प्राथमिकी दर्ज हुई.विशेष न्यायालय ने 21 दिसंबर, 2018 को दोषी करार दिया दे दिया. तब उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द हो गई.इस सीट पर 2019 में विधानसभा उपचुनाव कराया गया. उपचुनाव में JDU के कौशल यादव जीत गए. 2020 विधानसभा चुनाव में राज बल्लभ की पत्नी विभा लड़ीं और जीत गई.

लालू परिवार से क्यों बढ़ी दूरी- 2022 में विधान परिषद का चुनाव था. राजबल्लभ अपने भतीजे को चुनाव लड़वाना चाहते थे. तेजस्वी ने राजबल्लभ की मर्जी से अलग श्रवण कुशवाहा को कैंडिडेट बना दिया. राजबल्लभ ने भतीजे और कृष्णा यादव के बेटे अशोक यादव को निर्दलीय उतार दिया. अशोक यादव चुनाव जीत गए.अशोक यादव ने विधान परिषद के सभापति से JDU के MLC के साथ बैठने की गुजारिश की. सभापति ने इसे मंजूर कर लिया.MLC चुनाव के बाद राजबल्लभ 2024 के लोकसभा चुनाव में छोटे भाई विनोद यादव को चुनाव लड़वाना चाहते थे. तेजस्वी ने फिर उनकी बात नहीं मानी और MLC चुनाव में हारे श्रवण कुशवाहा को कैंडिडेट बना दिया.राजबल्लभ यादव ने अपने भाई विनोद यादव को निर्दलीय मैदान में उतार दिया. इसका सीधा नुकसान RJD के कैंडिडेट को हुआ. RJD का यादव वोट बिखर गया. विनोद यादव को करीब 39 हजार वोट मिले. श्रवण कुशवाहा 67 हजार वोट से ये चुनाव हार गए. यहां से BJP के विवेक ठाकुर चुनाव जीते.

रजौली से प्रकाश वीर RJD के टिकट पर लगातार दो बार से जीत रहे हैं. प्रकाश वीर चौधरी (पासी) कम्युनिटी से आते हैं. विभा देवी के साथ वे भी PM मोदी के साथ मंच पर थे.प्रकाश वीर ने इस पर सफाई दी थी, ‘मुझे तीन दिन पहले आमंत्रण आया था. इसलिए हम लोग गए. कोई पार्टी की मीटिंग नहीं थी. प्रधानमंत्री हम सबके हैं. हम लोग देखने और सुनने गए थे कि PM देश के गरीबों के लिए क्या-क्या काम कर रहे हैं. हम लोग अभी RJD में हैं. राजबल्लभ जी का आदेश मिल जाएगा, तो अभी रिजाइन कर देंगे. हाल में तेजस्वी यादव वोटर अधिकार यात्रा के दौरान नवादा पहुंचे थे. वहां कुछ लोगों ने प्रकाश वीर को विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं देने की मांग की, इस पर तेजस्वी यादव ने अपनी सहमति दे दी.इससे पहले लोकसभा चुनाव में ही तेजस्वी यादव ने साफ कर दिया था कि प्रकाश वीर को विधानसभा का टिकट नहीं देंगे.

इनकी राजनीतिक ताकत क्या है.ये तो राजबल्लभ yadav के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं?

प्रकाश वीर, राज बल्लभ यादव के करीबी माने जाते हैं. बताया जाता है कि वह ही उन्हें टिकट दिलवाते हैं और जिताते हैं. अब जब राज बल्लभ परिवार RJD से दूर जा रहा है तो प्रकाश वीर का रहना मुश्किल होगा.रजौली विधानसभा में SC-ST कम्युनिटी के करीब 97 हजार वोट हैं. इनके अलावा यहां अति पिछड़ा और यादव के लगभग 1 लाख वोट हैं. सवर्ण वोटर्स करीब 30 हजार हैं. वैश्य और मुस्लिम वोटर्स की आबादी यहां लगभग 20-20 हजार हैं. यहां से RJD से पिंकी भारती का नाम टिकट के दावेदारों में शामिल है.

लखीसराय के सूर्यगढ़ा से विधायक प्रह्लाद यादव RJD के संस्थापक सदस्य कहे जाते हैं. 1995 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं. दबंग और बाहुबली छवि के प्रह्लाद यादव ने फरवरी 2024 में नीतीश सरकार के फ्लोर टेस्ट के दौरान RJD से अलग लाइन लिया और सरकार के पाले में चले गए.हाल में उनके टिकट को लेकर NDA के अंदर ही बयानबाजी सुनने को मिली थी. एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा था, ‘सूर्यगढ़ा JDU की सीट है तो JDU ही उम्मीदवार तय करेगी. हम अपने सामाजिक समीकरण को देखते हुए निर्णय लेंगे. एक बात जरूर है कि लखीसराय का आतंक यहां से हमारा उम्मीदवार नहीं होगा.’


प्रह्लाद यादव डिप्टी CM विजय सिन्हा के करीबी माने जाते हैं.वह कह चुके हैं कि मेरी कुर्बानी को तवज्जो दी जानी चाहिए. विजय सिन्हा के कहने पर ही मैं NDA के साथ आया था. प्रह्लाद यादव हमेशा लालू परिवार के साथ रहे. लंबे समय तक लखीसराय के पार्टी के जिलाध्यक्ष भी थे. इलाके में काफी प्रभावशाली माने जाने वाले प्रह्लाद यादव पहली बार 1995 में निर्दलीय विधायक चुने गए थे.इसके बाद वह 2000, 2005, 2015 और 2020 में RJD के टिकट पर जीतते रहे हैं. 2025 विधानसभा चुनाव लड़ने का भी उन्होंने ऐलान किया है.प्रह्लाद यादव का बालू का बड़ा कारोबार है.बालू के पैसे से ही उनकी पूरी राजनीति चलती है. ऐसे में सरकार के आसपास रहने से उनको फायदा दिख रहा था.

शिवहर से RJD विधायक चेतन आनंद ने फरवरी 2024 में नीतीश सरकार के फ्लोर टेस्ट के दौरान ही पाला बदल लिया था. वह RJD की जगह JDU के साथ हो गए थे.हालांकि, चेतन आनंद ने अब तक आधिकारिक तौर पर RJD से इस्तीफा नहीं दिया है. अभी उनकी मां लवली आनंद शिवहर से JDU की सांसद हैं.चेतन आनंद बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन के बड़े बेटे हैं. वह भी शिवहर से सांसद रह चुके हैं. यहां राजपूत, ब्राह्मण, मुस्लिम और पटेल समाज जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाता है.इस इलाके के सवर्ण समाज में आनंद मोहन की पकड़ शुरू से मजबूत रही है. वैसे इस इलाके में स्वर्गीय रघुनाथ झा की भी पकड़ मानी जाती है. हाल में उनके पोते नवनीत कुमार झा RJD में शामिल हुए हैं. पार्टी यहां से उन्हें चुनाव में उतार सकती है.DM जी. कृष्णैया की हत्या में उम्रकैद की सजा काट रहे आनंद मोहन को नीतीश सरकार ने 2023 में जेल मैनुअल में संशोधन कर रिहा कर दिया.जेल से बाहर आते ही आनंद मोहन नीतीश कुमार के साथ घूमने लगे. वैसे उनकी राजनीति की शुरुआत लालू शासन का विरोध से ही हुई थी.पिता को जेल से बाहर निकालने और लोकसभा चुनाव में मां को टिकट देने के वादे ने चेतन आनंद को RJD से दूर कर दिया.

बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह की राह RJD से अलग हो गई है. उनकी पत्नी और विधायक नीलम देवी JDU की तरफ हो गई हैं.
AK-47 केस में सजा होने के बाद अनंत सिंह की सदस्यता रद्द हो गई थी. उसके बाद 2022 में हुए उपचुनाव में नीलम देवी RJD के टिकट पर चुनाव लड़ी और जीत गईं.फरवरी 2024 में नीतीश सरकार की फ्लोर टेस्ट के दौरान नीलम देवी JDU की तरफ हो गईं. इसके बाद अनंत सिंह को लोकसभा चुनाव से पहले पेरोल मिली और उन्होंने ललन सिंह के लिए जमकर प्रचार किया. ललन सिंह चुनाव जीत गए.AK-47 केस में अनंत सिंह हाईकोर्ट से बरी हो गए हैं और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. मोकामा की राजनीतिक जमीन पर अनंत सिंह की मजबूत पकड़ है. बीते 20 साल से उनको कोई हरा नहीं पाया है. 2005 से लगातार उनका कब्जा है. वह JDU-RJD, यहां तक की वह निर्दलीय भी चुनाव जीत चुके हैं.

अनंत सिंह की लालू परिवार से दूरी का कोई कारण अब तक सामने नहीं आया है. हालांकि, उनका जेल से बाहर आना एक कारण माना जाता है. चूंकि, नीतीश सरकार में ही वह जेल गए और उसी सरकार में बरी भी हुए.RJD की तरफ से 2025 में कौन उम्मीदवार होगा, अभी तय नहीं है. एक चर्चा है कि पशुपति नाथ पारस अगर महागठबंधन में शामिल होते हैं तो यह सीट उनके खाते में जा सकती है. तब वहां से पूर्व सांसद सूरजभान सिंह के परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़ सकता है.

फरवरी 2024 में नीतीश सरकार के फ्लोर टेस्ट के दौरान RJD से किनारा करने वाली चौथी विधायक संगीता कुमारी थीं. वह ऐन मौके पर BJP की तरफ चली गई थी.तब उन्होंने कहा था, ‘मुझे लगा कि कहीं न कहीं पार्टी (RJD) में दलितों का सम्मान नहीं हो रहा था. इसलिए हमने यह निर्णय लिया. कहा जाता है कि RJD के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह की करीबी होने की वजह से संगीता कुमार को मोहनिया से टिकट दिया गया था. वह मूल रूप से कैमूर की रहने वाली हैं.2020 विधानसभा चुनाव में संगीता ने बीजेपी के निरंजन राम को हराया था.सूचना है कि निरंजन राम RJD के संपर्क में हैं और विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट मिल सकता है.

भभुआ से RJD विधायक भरत बिंद भाजपा के संपर्क में हैं. उन्होंने 2020 विधानसभा चुनाव में भाजपा की रिंकी रानी पांडेय को हराया था.
कैमूर जिले की भभुआ विधानसभा सीट में कोयरी और कुर्मी वोटर अधिक हैं. सवर्णेों में ब्राह्मण और कायस्थ अधिक हैं. भरत बिंद ने राजनीति की शुरुआत जिला परिषद से की है. वह 2015 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। हार गए। 2020 में RJD के टिकट पर लड़े और जीत गए.सूचना है कि 2025 विधानसभा चुनाव में भभुआ सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है. यहां कांग्रेस अपनी तैयारी कर रही है. अगर कांग्रेस चुनाव लड़ी तो मुन्ना पांडेय को टिकट मिल सकता है.

महनार से बाहुबली नेता रामा सिंह की पत्नी वीणा सिंह RJD से विधायक हैं.2020 में रामा सिंह की एंट्री जब RJD में हुई थी तो रघुवंश प्रसाद सिंह ने विरोध किया था. रघुवंश बाबू ने तब पार्टी से इस्तीफा तक दे दिया था. रघुवंश बाबू का परवाह किए बिना वीणा सिंह को टिकट दिया गया था.उनके पति पूर्व सांसद रामा सिंह 2024 में RJD का साथ छोड़ चिराग पासवान वाली LJP(R) में चले गए। महनार सीट पर LJP(R) के टिकट पर रामा सिंह के खुद चुनाव लड़ने की चर्चा है. वैशाली एरिया में रामा सिंह की मजबूत पकड़ है. वह एरिया में राजपूतों के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं. राजपूत वोट बैंक चुनावी दृष्टिकोण से अहम है.माना जाता है कि रामा सिंह की पकड़ तेजस्वी यादव के राघोपुर विधानसभा सीट पर भी है.रामा सिंह 2024 लोकसभा चुनाव में वैशाली से टिकट चाहते थे. लेकिन नहीं मिला. वहां से पार्टी ने बाहुबली मुन्ना शुक्ला को टिकट दे दिया. इसके बाद रामा सिंह का पार्टी से मोह भंग हो गया.

मई में RJD सुप्रीमो लालू यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार से बाहर निकाल दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट कर अपनी नई रिलेशनशिप का ऐलान किया था. इस पर लालू यादव ने कार्रवाई की.तेज प्रताप यादव फिलहाल हसनपुर से RJD के विधायक हैं. वह महुआ से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. जब पार्टी से निकला दिया गया है तो जाहिर है टिकट RJD नहीं देगी. महुआ से RJD के मुकेश रौशन विधायक हैं.चुनाव नजदीक आते-आते तेज प्रताप के तेवर परिवार के प्रति कड़े होते जा रहे हैं. शनिवार को जहानाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान तेजस्वी के समर्थन में नारे लगाने पर भड़क गए.कार्यक्रम में एक युवक ने नारा लगाया- ‘अबकी बार तेजस्वी सरकार’…इतना सुनते ही तेज प्रताप ने कहा- ‘यहां फालतू बात मत करो. किसी व्यक्ति विशेष की सरकार नहीं आती है, जो घमंड करेगा, वो जल्दी गिरेगा और अगर नौटंकी करोगे तो रोजगार नहीं मिलेगा.’

Share This Article