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बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव ने सूबे के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। इस बीच सबसे बड़ी खबर भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री से आ रही है। पवन सिंह के करीबी मित्र और प्रसिद्ध गायक-अभिनेता गुंजन सिंह ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि ‘पावरस्टार’ पवन सिंह का राज्यसभा जाना अब लगभग सुनिश्चित हो चुका है।
गुंजन सिंह का दावा: “बस नोटिफिकेशन का इंतजार”
पटना में मीडिया से बात करते हुए गुंजन सिंह ने आत्मविश्वास के साथ कहा, “सब कुछ लगभग फाइनल है। जब आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होगा, तब सबको पता चल ही जाएगा। हालांकि जब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक ज्यादा कहना ठीक नहीं है, लेकिन उनका (पवन सिंह) सदन जाना अब तय मानिए।” गुंजन सिंह के इस बयान ने बिहार की राजनीति और भोजपुरी गलियारे में हलचल मचा दी है।
बीजेपी अध्यक्ष से हुई ‘गुप्त’ मुलाकात के क्या हैं मायने?
इस चर्चा को बल तब मिला जब 26 फरवरी 2026 को पवन सिंह ने दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की। बंद कमरे में करीब आधे घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि बीजेपी पवन सिंह को उच्च सदन भेजने की तैयारी में है।
जब पत्रकारों ने पवन सिंह से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने अपनी चिर-परिचित शैली में जवाब दिया, “मैं पार्टी का एक सिपाही हूं, जो मालिक (नेतृत्व) कहेंगे, वही होगा।” उन्होंने इस मुलाकात को ‘शिष्टाचार भेंट’ बताया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे ‘टिकट फाइनल’ होने की मुहर माना जा रहा है।
राज्यसभा का गणित: एनडीए का पलड़ा भारी
बिहार की 5 राज्यसभा सीटें 9 अप्रैल 2026 को खाली हो रही हैं। वर्तमान स्थिति और ‘मैजिक नंबर’ (41 वोट प्रति सीट) को देखें तो समीकरण कुछ इस प्रकार हैं:
एनडीए की राह आसान: जेडीयू के हरिवंश नारायण, रामनाथ ठाकुर और आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा की सीटें खाली हो रही हैं। एनडीए के पास पर्याप्त संख्या बल है जिससे उसकी 4 सीटें सुरक्षित मानी जा रही हैं।
आरजेडी का संकट: आरजेडी कोटे से अमरेंद्र धारी सिंह और प्रेमचंद गुप्ता की सीटें खाली हो रही हैं। विधानसभा चुनाव में कम सीटों के कारण आरजेडी के पास 41 का जादुई आंकड़ा नहीं है। ऊपर से ओवैसी की पार्टी (AIMIM) के रुख ने आरजेडी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
पवन सिंह को राज्यसभा भेजकर बीजेपी न केवल एक ‘क्राउड पुलर’ चेहरे को सदन में लाएगी, बल्कि यूपी-बिहार के बड़े वोट बैंक को भी साधने की कोशिश करेगी। 6 मार्च नामांकन की आखिरी तारीख है, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या पवन सिंह के नाम पर आधिकारिक मुहर लगती है।