सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नजदीक आते ही महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। महागठबंधन के सबसे पुराने सहयोगी दल कांग्रेस ने अपने पत्ते खोलते हुए 76 सीटों पर अपनी दावेदारी तय कर ली है। दिल्ली में हुई पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी की अहम बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि कांग्रेस ने इन सीटों पर अपनी रणनीति बना ली है और मौजूदा 17 विधायकों का टिकट भी लगभग फाइनल कर दिया है।
लेकिन इसी बीच, महागठबंधन के भीतर से कांग्रेस की इस मांग पर सवाल उठने लगे हैं। CPI-ML (लिबरेशन) ने कांग्रेस को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि उन्हें अपनी “औकात” देखकर ही सीटों की मांग करनी चाहिए। CPI-ML के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि कांग्रेस को कम सीटों पर लड़ना चाहिए और जीत का प्रतिशत बढ़ाना चाहिए, जैसा कि उन्होंने 2015 में किया था। उनका तर्क है कि 2020 में 70 सीटों पर लड़ने के बावजूद कांग्रेस को सिर्फ 19 सीटों पर ही जीत मिली थी, जबकि 2015 में 40 सीटों पर लड़कर उन्होंने 27 सीटें जीती थीं।
दिल्ली में हुई कांग्रेस की अहम बैठक
19 सितंबर को दिल्ली में हुई कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में पार्टी के कई बड़े नेता शामिल थे, जिनमें बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावारु, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, विधायक दल के नेता शकील अहमद खान और विधान परिषद में दल के नेता मदन मोहन झा प्रमुख थे। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में 76 विधानसभा क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा हुई और करीब तीन दर्जन सीटों पर उम्मीदवारों के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं। कांग्रेस ने अपने मौजूदा 17 विधायकों का टिकट नहीं काटने का भी फैसला लिया है, जिससे उनका फिर से मैदान में उतरना तय है।
‘क्लस्टर मॉडल’ पर काम करेगी कांग्रेस
कांग्रेस ने इस बार चुनाव में अपनी रणनीति को व्यवस्थित करने के लिए ‘क्लस्टर मॉडल’ पर काम करने का निर्णय लिया है। इस मॉडल के तहत, न केवल प्रत्याशी, बल्कि उनकी मदद के लिए स्थानीय रणनीति बनाने वाले नेताओं का भी एक समूह तैयार किया जाएगा। इसका मकसद बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना है, ताकि चुनावी तैयारी ज्यादा प्रभावी हो सके।
प्रियंका गांधी की एंट्री
कांग्रेस ने चुनाव में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए प्रियंका गांधी को भी चुनावी रणनीति में शामिल करने का फैसला किया है। 26 सितंबर को प्रियंका गांधी की बिहार यात्रा प्रस्तावित है, जिसमें वह सीमांचल और उत्तर बिहार में चुनावी रैलियां करेंगी। माना जा रहा है कि उनकी पहली बड़ी सभा कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरेगी। उनकी रैलियों की तैयारियों और मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष समिति भी बनाई जाएगी।
कांग्रेस की 76 सीटों की मांग और CPI-ML की तीखी प्रतिक्रिया से साफ है कि महागठबंधन में सीट बंटवारा आसान नहीं होगा। अब सबकी नजरें RJD और उसके आलाकमान पर टिकी हैं कि वह इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अपनी मांग पर कायम रहती है या गठबंधन के हित में समझौता करती है।