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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुजफ्फरपुर जिले की गायघाट विधानसभा सीट पर राजनीतिक मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। इस बार यहाँ दो प्रमुख राजनीतिक परिवारों के प्रतिनिधि आमने-सामने हैं, जिसने इस सीट को जिले की सबसे हॉट सीटों में से एक बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुकाबला केवल दो उम्मीदवारों के बीच का नहीं, बल्कि स्थापित जनाधार और नए सिरे से बन रहे गठबंधन समीकरणों की अग्निपरीक्षा है।
जिले की सबसे बड़ी सीट: निर्णायक होंगी महिलाएँ
जिले के उत्तरी भाग में फैली गायघाट विधानसभा क्षेत्र, 23 (गायघाट), 12 (बंदरा) और 6 (कटरा) पंचायतों से मिलकर बना है। यह औराई के बाद जिले में सर्वाधिक मतदाताओं वाला क्षेत्र है, जहाँ मतदाताओं की कुल संख्या 3.20 लाख से अधिक है।
इस सीट पर उम्मीदवारों का भविष्य तय करने में महिला मतदाताओं की भूमिका निर्णायक साबित होगी। यहाँ 1.68 लाख पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 1.51 लाख महिला मतदाता हैं। पिछले चुनाव (2020) के आंकड़े बताते हैं कि जहाँ कुल मतदान 57.75% था, वहीं 64.77% महिलाओं ने मतदान किया था, जबकि पुरुषों का मतदान प्रतिशत केवल 51.42% रहा। महिला मतदाताओं की यह उच्च भागीदारी इस बार भी जीत-हार का अंतर तय करेगी।
मजबूत राजनीतिक विरासत का इतिहास
गायघाट विधानसभा सीट का एक समृद्ध राजनीतिक इतिहास रहा है। जेपी आंदोलन से पूर्व यह क्षेत्र लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ रहा, जहाँ नीतीश्वर प्रसाद सिंह ने लगातार छह बार (1952 से 1972) जीत हासिल की। इसके बाद, महेश्वर प्रसाद यादव ने विभिन्न दलों के टिकट पर पाँच बार (1990, 1995, 2005 फरवरी, 2005 अक्टूबर, और 2015) इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, जो यहाँ के एक प्रमुख राजनीतिक घराने के प्रभाव को दर्शाता है।
इस क्षेत्र ने भाजपा को भी बड़ी सफलता दिलाई है। 1980 के विधानसभा चुनाव में जितेंद्र प्रसाद सिंह ने जिले में भाजपा का खाता खोला। इसके बाद, 2010 के चुनाव में वैशाली की वर्तमान सांसद वीणा देवी ने भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की थी।
पिछली हार का बदला और वर्तमान समीकरण
पिछले विधानसभा चुनाव (2020) में, राजद के निरंजन राय ने त्रिकोणीय मुकाबले में जीत दर्ज की थी, उन्होंने जदयू के महेश्वर यादव को 7,566 वोटों से हराया। इस मुकाबले में, तत्कालीन लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) की उम्मीदवार कोमल सिंह ने 36,851 वोट हासिल किए थे। उनके मैदान में होने से एनडीए (जदयू) के वोटों का बड़ा बंटवारा हुआ, जिससे राजद को जीत मिली। गायघाट उन सीटों में से थी जहाँ लोजपा की रणनीति के कारण जदयू को हार झेलनी पड़ी थी।
वर्तमान चुनाव में समीकरण बदल गए हैं। राजद के स्थापित नेता निरंजन राय एक बार फिर अपनी सीट बचाने के लिए मैदान में हैं, वहीं कोमल सिंह इस बार गठबंधन के तहत जनता दल यूनाइटेड (JDU) की उम्मीदवार हैं। कोमल सिंह, वैशाली की वर्तमान सांसद वीणा देवी की बेटी हैं, और उन्हें अब जदयू-भाजपा गठबंधन का पूरा समर्थन प्राप्त है। यह मुकाबला अब दो कद्दावर उम्मीदवारों के बीच एक सीधी टक्कर बन गया है, जिसमें कोमल सिंह जहाँ नए गठबंधन समीकरणों और युवा नेतृत्व का चेहरा हैं, वहीं निरंजन राय स्थापित जनाधार और निरंतरता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
गायघाट की जनता किसे मौका देती है, यह परिणाम न केवल मुजफ्फरपुर, बल्कि पूरे बिहार की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देगा।