सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के अंचल अधिकारी (CO) आरपार के मूड में हैं। निगरानी विभाग की ओर से लगातार हो रही कार्रवाई के खिलाफ पटना के गर्दनीबाग में राज्य के सैकड़ो अंचलाधिकारी धरना पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाई जा रही मुहीम के बहाने उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे सीओ का कहना है कि वे न तो अपने विभाग के खिलाफ हैं और न ही सरकार के खिलाफ हैं। जिस तरह से दमनकारी तरीके से कार्रवाई हो रही है, वह चिंता का विषय है। अंचल अधिकारी हमेशा जनता की समस्याओं के समाधान में लगे रहते हैं। जमीन विवाद, अतिक्रमण, राजस्व कार्य, आपदा प्रबंधन और विधि-व्यवस्था जैसे मामलों में सबसे आगे सीओ ही रहते हैं। इसके बावजूद निगरानी की कार्रवाई में सिर्फ अंचल अधिकारियों को ही टारगेट किया जा रहा है।
उदाहरण देते हुए सीओ शंकर सिन्हा ने कहा कि हाल ही में डंडारी में एक सीओ 20 सूत्री कार्यक्रम की बैठक में शामिल थे। बैठक के दौरान ही निगरानी विभाग की टीम उन्हें बीच से उठाकर ले गई। न तो उन्हें रंगे हाथ पकड़ा गया और न ही कोई ठोस सबूत पेश किया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सीओ के साथ ही इस तरह का व्यवहार क्यों किया जा रहा है। संघ ने कहा कि निगरानी विभाग की नजर सिर्फ CO पर ही क्यों है? क्या बाकी सेवाएं और अधिकारी पूरी तरह निष्कलंक हैं?। सरकार का 80 प्रतिशत कार्य सीओ के माध्यम से होता है। अगर सीओ बेईमान हैं, तो फिर सरकार का काम कौन कर रहा है? विधि व्यवस्था, आपदा, अतिक्रमण, भू-विवाद, राजस्व कार्य और चुनाव-पर्यवेक्षण तक सभी जिम्मेदारियां सीओ ही निभाते हैं। अगर निगरानी की कार्रवाई पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत होती है, तो दोष सिद्ध होने की दर केवल 60 प्रतिशत ही क्यों है?
धरने पर बैठे अंचल अधिकारियों ने मांग की है कि निगरानी विभाग निष्पक्ष जांच करे और सिर्फ सीओ को निशाना बनाना बंद करे। उनका कहना है कि अगर सरकार की सेवा को पारदर्शी बनाना है तो कार्रवाई हर स्तर पर समान रूप से होनी चाहिए। अंचलाधिकारियों ने लगे हाथ जांच एजेंसी के अधिकारियों को धमकी भी दे दी है। उन्होंने जाँच एजेंसी के तमाम अधिकारियों की सम्पति के ब्यौरे को जानता के सामने ला देने की चेतावनी दे दी है।