महागठबंधन में सीट बंटवारे में देरी से तकरार, CPM ने अपने विधायकों को नामांकन की दी मंजूरी, माले ने RJD का 19 सीटों का ऑफर ठुकराया

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नज़दीक आते ही महागठबंधन (Grand Alliance) के भीतर सीट बंटवारे (Seat Sharing) को लेकर खींचतान चरम पर पहुंच गई है। गठबंधन के सबसे बड़े घटक राष्ट्रीय जनता दल (RJD) द्वारा सीट शेयरिंग की बातचीत में हो रही अत्यधिक देरी ने सहयोगी दलों की बेचैनी बढ़ा दी है। इस बढ़ते गतिरोध के बीच, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) और भाकपा माले (CPI-ML) ने अब अपने-अपने स्तर पर रणनीतिक और दबावकारी कदम उठाए हैं।

CPM का बड़ा कदम: दो विधायकों को नामांकन की मंजूरी
सीट बंटवारे में हो रही देरी से परेशान माकपा (CPM) ने अब अपने स्तर पर रणनीतिक फैसला लेते हुए अपने दो मौजूदा विधायकों को चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की मंजूरी दे दी है।

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पार्टी के राज्य सचिव मंडल सदस्य मनोज चंद्रवंशी ने जानकारी दी कि विभूतिपुर से वर्तमान विधायक अजय कुमार और मांझी से विधायक सत्येंद्र यादव। इन दोनों विधायकों को इंडिया गठबंधन समर्थित उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। माकपा ने यह भी घोषणा की है कि वह अपनी बाकी 9 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा एक-दो दिनों में कर देगी। माकपा की यह पहल RJD पर जल्द से जल्द सीट बंटवारा फाइनल करने का दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखी जा रही है।

CPI-ML ने ठुकराया RJD का ऑफर, 30 सीटों की रखी मांग
महागठबंधन की एक और महत्वपूर्ण सहयोगी पार्टी भाकपा माले (CPI-ML) ने भी RJD के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। माले ने RJD द्वारा प्रस्तावित 19 सीटों के ऑफर को ठुकराते हुए अपनी नई सूची भेज दी है।

भाकपा माले ने साफ तौर पर 30 सीटों की मांग रखी है। पार्टी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उनकी यह मांग बिना किसी समझौते या मोलभाव के मानी जानी चाहिए। माले का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वे अपनी सीटों की संख्या पर किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं हैं और विधानसभा में अपनी बढ़ी हुई ताकत के आधार पर सीटों की मांग कर रहे हैं।

महागठबंधन में बढ़ते मतभेद
सीट बंटवारे को लेकर माकपा और माले दोनों का यह आक्रामक रुख स्पष्ट करता है कि महागठबंधन के भीतर मतभेद गहराते जा रहे हैं। सहयोगी दलों को डर है कि नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद RJD जानबूझकर देरी कर रही है। इन सहयोगी दलों के द्वारा एकतरफा फैसला लेने से तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले गठबंधन पर अब अंतिम निर्णय लेने का दबाव काफी बढ़ गया है, ताकि चुनावी तैयारी में और अधिक देरी न हो।

अगर जल्द ही सीटों के तालमेल पर सहमति नहीं बनती है, तो यह महागठबंधन की एकता और चुनावी संभावनाओं के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। बता दें कि पिछली बार विधानसभा चुनाव में CPI-ML ने 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से 12 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं, हालिया लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 3 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 2 सीटें जीत ली थीं।

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