क्या चुनाव आयोग EVM उधार देता है? जानिए मशीन देने की असली प्रक्रिया और शर्तें…

Ritu Raj

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की गहमागहमी के बीच एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) चर्चा में है। जैसे-जैसे मतदान की तारीखें नजदीक आ रही हैं, मतदाताओं के मन में कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत निर्वाचन आयोग चुनाव कराने के लिए किसी को EVM उधार देता है? अगर हां, तो इसकी प्रक्रिया क्या है और किन शर्तों के तहत ऐसा संभव है? आइए जानते हैं EVM से जुड़ी इस पूरी प्रक्रिया और नियमों के बारे में विस्तार से।

संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत भारत निर्वाचन आयोग देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए सर्वोच्च निकाय है। आयोग का दायरा राष्ट्रीय और राज्य स्तर के चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना भी है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या तकनीकी समझौता न हो।

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स्थानीय निकाय चुनावों में EVM की मांग कैसे होती है?
भारत निर्वाचन आयोग लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल की जाने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का निर्माण और वितरण नियंत्रित करता है। हालांकि, पंचायत, नगर पालिका और नगर परिषद जैसे स्थानीय निकायों के चुनावों का संचालन राज्य चुनाव आयोग करता है। यदि किसी राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव के कानून में EVM के उपयोग की अनुमति है, तो उस राज्य का चुनाव आयोग भारत निर्वाचन आयोग से औपचारिक रूप से मशीनें उधार मांग सकता है।
EVM उधार देने की सख्त प्रक्रिया:
भारत निर्वाचन आयोग से EVM उधार लेने की प्रक्रिया पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियमों के तहत की जाती है।
राज्य चुनाव आयोग को कम से कम छह महीने पहले औपचारिक अनुरोध करना होता है।
केवल वे राज्य ही मशीनें मांग सकते हैं जिनके स्थानीय कानूनों में EVM उपयोग का प्रावधान है।
आयोग ऐसी मशीनें उधार देता है जो अब राष्ट्रीय या विधानसभा चुनावों में उपयोग में नहीं हैं, लेकिन जिनकी 15 साल की प्रमाणित सेवा अवधि बाकी है।
भारत निर्वाचन आयोग पहले अपनी चुनावी जरूरतें पूरी करता है, उसके बाद ही उधार की अनुमति देता है।
EVM की सुरक्षा और जवाबदेही:
उधार दी गई मशीनें भारत निर्वाचन आयोग की निगरानी में रहती हैं। राज्य चुनाव आयोग को मशीनों के संचालन, रखरखाव और उपयोग से जुड़ी नियमित रिपोर्ट ECI को सौंपनी होती है। इन रिपोर्टों में मशीनों की संख्या, उपयोग की स्थिति और सुरक्षा से संबंधित सभी विवरण दर्ज होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यही है कि देश के किसी भी स्तर पर होने वाले चुनावों में EVM की विश्वसनीयता, सुरक्षा और पारदर्शिता पर कोई सवाल न उठे। चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करता है कि हर मशीन का इस्तेमाल केवल अधिकृत निकायों द्वारा, तय नियमों के तहत ही किया जाए ताकि लोकतंत्र की नींव निष्पक्षता पर कायम रहे।

ईवीएम के इस्तेमाल से लेकर उसकी वापसी तक की यह पूरी प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और सख्त निगरानी में पूरी की जाती है। भारत निर्वाचन आयोग और राज्य चुनाव आयोग दोनों मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि मशीनों की विश्वसनीयता, सुरक्षा और निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे। हर चरण तय नियमों और रिकॉर्ड के साथ किया जाता है। यही वजह है कि भारत की चुनाव प्रक्रिया आज दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे भरोसेमंद लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में गिनी जाती है, जहां हर वोट की सुरक्षा और हर मतदाता के अधिकार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

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