सिटी पोस्ट लाइव
केंद्रीय मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतनराम मांझी इन दिनों अपनी बयानबाजी से एनडीए गठबंधन की परेशानी बढ़ा रहे हैं। हाल ही में मांझी के कई बयान सामने आए हैं, जिनसे सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव प्रबंधन से लेकर राज्यसभा चुनाव तक, उनका हर बयान पार्टी और गठबंधन के अंदरूनी समीकरणों को चुनौती दे रहा है। अब सवाल उठ रहा है कि पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार इन विवादों से एनडीए को कैसे उबारेंगे।
सबसे पहले, मांझी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान ‘वोट मैनेजमेंट’ को लेकर एक विवादित बयान दिया। इस बयान में उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने अपने कैंडिडेट को हारते हुए सीट पर 2700 वोट मैनेज कर विजय दिलाई थी। इस बयान ने विपक्ष को बीजेपी और चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाने के लिए एक और मुद्दा दे दिया। जब विवाद बढ़ा, तो मांझी ने सफाई दी कि उनका बयान तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था।
इसके बाद, मांझी ने अपने बेटे और मंत्री संतोष कुमार सुमन को सार्वजनिक मंच से सलाह दी कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए पैसों का इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि सांसद और विधायक अपने फंड से 10 प्रतिशत कमीशन लेते हैं और उनके बेटे को भी ऐसा करना चाहिए। इस बयान ने एनडीए की नीति और नैतिकता पर सवाल उठाए हैं।
इसके अलावा, राज्यसभा चुनाव को लेकर भी मांझी ने नया विवाद पैदा किया है। बिहार से आगामी अप्रैल में राज्यसभा की 5 सीटें खाली हो रही हैं। इस में से एनडीए के हिस्से में कम से कम 4 सीटें आने की संभावना है, लेकिन मांझी भी अपनी पार्टी के लिए एक सीट की मांग कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, मांझी ने अपने बेटे को धमकाया और कहा कि अगर राज्यसभा की सीट नहीं दी गई, तो वे एनडीए छोड़ सकते हैं। इस मामले में अब तक कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।
बिहार की राजनीति में यह घटनाएं एनडीए के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती हैं। अब यह देखना बाकी है कि पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार इन समस्याओं का समाधान कैसे निकालते हैं और जीतनराम मांझी को कैसे मैनेज करते हैं।