“पति के कॉलम में ज्योति ने लिखा ‘परित्यक्त नारी’, क्या है इसका मतलब?”…

Ritu Raj

बिहार के रोहतास जिले की काराकाट विधानसभा सीट पर राजनीतिक हलचल के साथ-साथ एक निजी पारिवारिक विवाद ने भी जोर पकड़ लिया है। भोजपुरी सुपरस्टार और बीजेपी नेता पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने 20 अक्टूबर 2025 को इस सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। नामांकन के साथ ही दाखिल उनके चुनावी हलफनामे (शपथ पत्र) ने सबको चौंका दिया। हलफनामे में ज्योति सिंह ने अपनी वैवाहिक स्थिति को ‘परित्यक्ता नारी’ बताया है, जबकि पति के नाम वाले कॉलम में पवन सिंह का नाम न लिखकर सिर्फ ‘प्रसिद्ध भोजपुरी कलाकार’ अंकित किया।

बता दें, परित्यक्ता महिला वह होती है, जिसे उसके पति ने बिना किसी औपचारिक कानूनी तलाक या प्रक्रिया के त्याग दिया हो। यह शब्द संस्कृत के “परित्याग” से लिया गया है, जिसका अर्थ है “त्यागना” या “छोड़ देना”। सामान्य शब्दों में, परित्यक्ता महिला ऐसी विवाहित महिला होती है, जिसे उसके पति ने बिना किसी स्पष्ट कारण, जिम्मेदारी या कानूनी अलगाव के छोड़ दिया हो। ऐसी स्थिति में वह सामाजिक, भावनात्मक और कभी-कभी आर्थिक रूप से भी अलग-थलग पड़ जाती है। यह स्थिति तलाकशुदा महिला से भिन्न है, क्योंकि तलाकशुदा महिला का विवाह कानूनी रूप से समाप्त हो जाता है, जबकि परित्यक्ता महिला कानूनी रूप से विवाहित रहती है, परंतु वैवाहिक जीवन से वंचित रहती है। दरअसल, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिला में अंतर परित्यक्ता महिला और तलाकशुदा महिला के बीच मुख्य अंतर उनकी कानूनी और सामाजिक स्थिति में है। तलाकशुदा महिला वह होती है, जिसका विवाह कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से समाप्त हो चुका होता है, और वह वैवाहिक बंधन से पूरी तरह मुक्त होती है। इसके विपरीत, परित्यक्ता महिला का विवाह कानूनी रूप से बरकरार रहता है, लेकिन वह अपने पति के साथ वैवाहिक जीवन नहीं जी पाती। इस स्थिति में वह सामाजिक और भावनात्मक रूप से अकेलापन महसूस करती है, और कई बार उसे आर्थिक तंगी का सामना भी करना पड़ता है।

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परित्यक्ता महिला के अधिकार:
1) भरण-पोषण का अधिकार:
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 24: परित्यक्ता महिला अपने पति से भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) की मांग कर सकती है, यदि वह अपनी आजीविका चलाने में असमर्थ है।
आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125: यह धारा भी परित्यक्ता या तलाकशुदा महिला को पति से भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकार देती है, यदि वह स्वयं को बनाए रखने में सक्षम नहीं है।
2) निवास का अधिकार:
परित्यक्ता महिला को अपने पति के घर में रहने का अधिकार है, चाहे वह पति का स्वामित्व वाला घर हो या ससुराल वालों का। यह अधिकार उसे हिंदू विवाह अधिनियम और संबंधित कानूनों के तहत मिलता है।
3) उत्तराधिकार का अधिकार:
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956: यदि पति की मृत्यु हो जाती है, तो परित्यक्ता महिला को प्रथम श्रेणी की उत्तराधिकारी के रूप में पति की संपत्ति में समान हिस्सा मिलता है। यह अधिकार तलाकशुदा महिला को प्राप्त नहीं होता, जब तक कि तलाक कानूनी रूप से पूरा न हुआ हो।
4) आर्थिक सहायता (पेंशन):
कई राज्यों में परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता के रूप में पेंशन योजनाएं लागू हैं। इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए संबंधित राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों और पात्रता मानदंडों की जांच आवश्यक है।

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