सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजनीति के गलियारों में रविवार की सुबह एक बड़ी सरगर्मी लेकर आई। नए साल के आगाज के बाद पहली बार केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान मुख्यमंत्री आवास पहुंचे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस मुलाकात ने राज्य के सियासी पारे को चढ़ा दिया है, क्योंकि इसे महज एक औपचारिक शिष्टाचार भेंट के रूप में नहीं देखा जा रहा है।
नए साल की बधाई और खास मौजूदगी
चिराग पासवान सुबह-सुबह ही मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, जहां उन्होंने सीएम नीतीश कुमार को नव-वर्ष की शुभकामनाएं दीं। इस खास मौके पर चिराग के साथ लोजपा (रा) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी और बिहार सरकार के मंत्री संजय पासवान भी मौजूद रहे। चिराग पासवान ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, “आज पटना में बिहार के मुख्यमंत्री आदरणीय नीतीश कुमार जी से शिष्टाचार मुलाकात कर उन्हें नव-वर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।”
खरमास के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट
सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि खरमास (14 जनवरी) के समाप्त होते ही बिहार में नीतीश कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। वर्तमान में नीतीश सरकार में 26 मंत्री हैं, जबकि नियमों के अनुसार अभी 10 और मंत्रियों को जगह दी जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक:
भाजपा कोटा: मंत्रिमंडल में खाली जगहों में से 4 मंत्री भाजपा कोटे से बनाए जा सकते हैं।
जदयू कोटा: जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कोटे से 6 नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना है। चिराग और नीतीश की इस मुलाकात को इसी कैबिनेट विस्तार और गठबंधन के भीतर सीटों के तालमेल से जोड़कर देखा जा रहा है।
‘भारत रत्न’ की मांग पर चिराग का खुला समर्थन
मुलाकात के बीच एक और मुद्दा जो चर्चा का केंद्र बना हुआ है, वह है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग। जेडीयू नेता केसी त्यागी द्वारा पीएम मोदी को पत्र लिखे जाने के बाद चिराग पासवान ने भी इसका खुलकर समर्थन किया है। चिराग ने कहा, “नीतीश कुमार ने पिछले दो दशकों से जिस तरह बिहार का नेतृत्व किया है, वह सराहनीय है। वे निश्चित रूप से देश के सर्वोच्च सम्मान के काबिल हैं।”
बदलते समीकरणों के संकेत
कभी ‘नीतीश विरोध’ की राजनीति करने वाले चिराग पासवान और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच बढ़ती यह नजदीकी बिहार एनडीए (NDA) के भीतर एक मजबूत एकजुटता का संकेत दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों और मंत्रिमंडल विस्तार को देखते हुए चिराग की यह सक्रियता काफी अहम है।