चेस की नई क्वीन! 19 साल की दिव्या देशमुख ने रचा इतिहास, बनी विश्व विजेता…

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव

भारत की 19 वर्षीय बेटी ने आज शतरंज में देश का नाम गौरवान्वित किया है। इसने चेस का FIDE महिला विश्व कप अपने नाम कर लिया है। भारत की ही कोनेरू हम्पी को टाईब्रेक राउंड में शिकस्त दी है। इसके साथ ही देश की 88वीं ग्रैंडमास्टर भी बन गई है।

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दरअसल, दिव्या ने वर्ल्ड चैंपियन बनने के साथ अगले साल होने वाले विमेंस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए भी क्वालिफाई कर लिया। इस टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई करने वाली दूसरी भारतीय महिला बनीं। वहीं, कोनेरू हम्पी ने भी फाइनल में जगह बनाने के साथ कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई कर लिया। चैंपियन बनने के बाद दिव्या काफी भावुक हो गई,फिर उसके बाद अपनी मां को गले लगाया। महराष्ट्र की दिव्या ने सेमीफाइनल में पूर्व विश्व चैंपियन चीन की तान झोंगयी को 1.5-0.5 से मात दी। वहीं, आंध्र प्रदेश की कोनेरू हम्पी ने सेमीफाइनल के टाईब्रेकर में चीन की टिंगजी लेई को हराया। जिसके बाद अपने ही देश की दिव्या के साथ फाइनल मुकाबला हुई। बता दें, 2003 में हम्पी को अर्जुन पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

बता दें, टाई-ब्रेक राउंड का फॉर्मेट क्या होता है, इसमें 2 रैपिड गेम होते हैं,और हर गेम 10 मिनट का होता है। वहीं, 10 मिनट के 2 गेम में अगर स्कोर बराबर रहा, तो 2 और फास्ट गेम होता है। यह राउंड में हर गेम 5 मिनट का होता है। उस 5-5 मिनट के दोनों गेम भी बराबरी पर रहे, तो 3-3 मिनट के 2 गेम होते हैं। फिर 3-3 मिनट में गेम ड्रॉ रहा तो 3+2 मिनट के ब्लिट्ज (तेज) गेम्स तब तक चलते रहेंगे, जब तक विजेता का फैसला नहीं हो जाता।

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