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पटना: बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने विधानसभा चुनाव से पहले सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की आड़ में गरीबों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करने की साजिश रची जा रही है। तेजस्वी का दावा है कि पहले वोटर लिस्ट से गरीबों का नाम हटाया जाएगा, फिर उन्हें मिलने वाली पेंशन और राशन जैसी योजनाएं बंद कर दी जाएंगी।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि डर के कारण चुनाव आयोग को आगे कर भाजपा पीछे से पूरा खेल खेल रही है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि गरीबों को सिस्टम से बाहर कर उन्हें वोट देने के अधिकार और सरकारी योजनाओं से वंचित करने की एक सोची-समझी रणनीति बनाई गई है।
चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का मोर्चा
तेजस्वी यादव सहित विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर बुधवार को नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के कार्यालय में जाकर ज्ञापन सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में राजद, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई (माले), सपा सहित 11 पार्टियों के नेता शामिल थे। सभी ने मतदाता पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण और लोकतंत्र विरोधी बताया।
“बीजेपी के एजेंट की तरह काम कर रहा चुनाव आयोग”
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहा है और सत्ता पक्ष के सभी दल इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि “वन नेशन, वन इलेक्शन” की बात करने वाले खुद **गरीबों का हक छीनने में जुटे हैं।” तेजस्वी ने यह भी दावा किया कि भाजपा बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू करना चाहती है ताकि जनतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया जा सके।