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विशेष राज्य का दर्जा को लेकर नीतीश का बड़ा दांव.

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सिटी पोस्ट लाइव :  नीतीश सरकार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के नाम पर बड़ा दांव खेला है. विशेष राज्य का दर्जा देने का प्रस्ताव स्वीकृत कर नीतीश सरकार ने गेंद केंद्र के पाले में डाल दी है.बुधवार को बिहार कैबिनेट की बैठक में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए केंद्र से अनुरोध करने के फैसले को बिहार सरकार ने अपनी सहमति दे दी और नीतीश कैबिनेट ने इस एजेंडे पर मुहर लगा दी है.  सीएम ने कहा कि अगर केंद्र सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दे दे तो राज्य सरकार अपने सभी काम बहुत कम समय में ही पूरा कर लेगी.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग साल 2010 से ही की जा रही है. इसके लिए 24 नवंबर 2012 को पटना के गांधी मैदान में और 17 मार्च 2013 को दिल्ली के रामलीला मैदान में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए अधिकार रैली का आयोजन किया गया था. नीतीश कुमार ने बताया कि बिहार सरकार की मांग पर तत्कालीन केंद्र सरकार ने इसके लिए रघुराम राजन कमेटी भी बनाई थी, जिसकी रिपोर्ट पर सितंबर 2013 में प्रकाशित हुई थी. लेकिन, उसे समय भी तत्कालीन केंद्र सरकार ने इसके बारे में कुछ नहीं किया.

सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि मैंने 2017 में भी बिहार सरकार ने विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बिहार कैबिनेट की बैठक बिहार को विशेष राज्य का देने के लिए केंद्र से अनुरोध किया गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से बिहार के लोगों के हित को देखते हुए राज्य को अविलंब विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की है.

कैबिनेट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने  कहा कि देश में पहली बार बिहार में जाति आधारित गणना का काम कराया गया है. जाति आधारित गणना के सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति के आंकड़ों के आधार पर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण सीमा को 16% से बढ़कर 20% अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण की सीमा को एक प्रतिशत से बड़ा कर दो प्रतिशत किया गया है. इसके साथ ही अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की सीमा को 18% से बढ़कर 25%, पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की सीमा को 12% से बढ़कर 18% कर दिया गया है. सामाजिक रूप से कमजोर तबके के लिए आरक्षण सीमा को 50% से बढ़कर 65 प्रतिशत कर दिया गया है. आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10% पहले से ही आरक्षण की सुविधा दी गई है. इस तरह बिहार में आरक्षण का दायरा 75% तक पहुंच गया है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जाति आधारित गणना में सभी वर्गों को जोड़ा जाए तो बिहार में लगभग 94 लाख गरीब परिवार है. इन सभी परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने के लिए 2 लाख तक की राशि किस्तों में उपलब्ध कराई जाएगी.  63850 आवास इन और भूमि परिवारों को जमीन की खरीद के लिए दी जा रही ₹60000 की राशि की सीमा को बढ़कर एक लाख रुपये कर दिया गया है. साथ ही इन परिवारों को मकान बनाने के लिए 1 लाख 20000 रुपए दिए जाएंगे. इसी तरह 39 लाख परिवार जो झोपड़ियों में रह रहे हैं, उन्हें भी पक्का मकान मुहैया कराया जाएगा. इसके लिए प्रति परिवार एक लाख 20 हजार रुपए की दर से राशि उपलब्ध कराई जाएगी.

सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत अत्यंत निर्धन परिवारों को मदद के लिए अब 100000 के बदले 200000 दिए जाएंगे. इन सभी योजनाओं के क्रियान्वयन में लगभग 250000 करोड रुपए की राशि में होगी. इन कामों के लिए काफी बड़ी राशि की आवश्यकता होने के कारण इन्हें 5 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. सीएम ने कहा कि अगर केंद्र सरकार की ओर से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिल जाए तो राज्य सरकार इन सभी काम को बहुत कम समय में ही पूरा कर लेगी.

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