दुलारचंद हत्याकांड में नामजद पूर्व विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सिविल कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब उन्होंने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
हाईकोर्ट में सुनवाई की तैयारी:
बाहुबली नेता अनंत सिंह ने 24 दिसंबर को हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी। यह मामला न्यायमूर्ति अशोक कुमार पांडेय की कोर्ट में लिस्टेड है। उनके वकील कुमार हर्षवर्धन के अनुसार, इस सप्ताह मामले की सुनवाई होने की प्रबल संभावना है। दिलचस्प बात यह है कि उनके समर्थक इस कानूनी प्रक्रिया को काफी गोपनीय रख रहे हैं, ताकि रणनीति का खुलासा न हो।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के खौफनाक खुलासे:
– अंदरूनी चोटें: शरीर पर गहरे घाव, पसलियां टूटी हुई और फेफड़े फटे हुए पाए गए।
– ब्लीडिंग: फेफड़े फटने के कारण शरीर के अंदर अत्यधिक रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) हुई।
– हथियार का प्रयोग: रीढ़ की हड्डी और घुटनों पर चोट के साथ-साथ दाहिने पैर में गोली (फायरआर्म इंजरी) लगने के निशान भी मिले।

क्या था पूरा मामला?
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा टाल इलाके में राजनीतिक रंजिश ने हिंसक रूप ले लिया था।
तारीख: 30 अक्टूबर (हत्या की वारदात)।
घटना: जन सुराज प्रत्याशी के समर्थक दुलारचंद यादव की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
आरोप: हत्या का सीधा आरोप अनंत सिंह और उनके समर्थकों पर लगा।
गिरफ्तारी: 1 नवंबर की देर रात एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने खुद अनंत सिंह के आवास पर दबिश देकर उन्हें गिरफ्तार किया था।

दरअसल, इस हाई-प्रोफाइल केस का असर पुलिस प्रशासन पर भी देखने को मिला। वहीं, सबसे पहले ग्रामीण एसपी विक्रम सिहाग को हटाया गया। उनकी जगह अपराजित लोहान (2020 बैच) को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन मात्र 2 महीने बाद ही उनका तबादला जहानाबाद एसपी के रूप में कर दिया गया। अब सबकी नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं कि क्या अनंत सिंह को राहत मिलती है या उन्हें फिलहाल सलाखों के पीछे ही रहना होगा।