एक गलती, कई मौतें! रॉन्ग साइड ड्राइविंग बना जानलेवा ट्रेंड, आंकड़े चौंकाने वाले…

Ritu Raj

हर रोज़ सड़कों पर अनगिनत जिंदगियां खत्म हो रही हैं। तेज़ रफ्तार, लाल बत्ती तोड़ना, और सबसे खतरनाक है रॉन्ग साइड ड्राइविंग। यह सिर्फ एक छोटा-सा नियम तोड़ना नहीं, बल्कि सीधे-सीधे दूसरों की जान लेने वाला गंभीर अपराध बन चुका है। क्या हम वाकई समझ पा रहे हैं कि गलत दिशा में गाड़ी चलाने की यह आदत कितनी भयानक कीमत वसूल रही है?

भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की 2023 की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में उस साल लगभग 4.8 लाख सड़क हादसे हुए, जिनमें 1,72,890 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। यानी हर दिन औसतन 474 मौतें, या हर तीन मिनट में एक जान जाती है। हर घंटे करीब 20 लोग सड़क हादसों में अपना जीवन खो देते हैं। रॉन्ग साइड ड्राइविंग इस भयावह आंकड़े में बड़ा योगदान देती है। 2022 के आंकड़ों में ही इससे जुड़े उल्लंघनों से 9,094 मौतें दर्ज की गईं, और यह संख्या 2023-24 में और बढ़ी है। ओवर-स्पीडिंग के बाद यह एक प्रमुख वजह बनी हुई है, जो हजारों परिवारों को तबाह कर रही है।

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मध्य प्रदेश में स्थिति और भी चिंताजनक है। राज्य में 2023 में सड़क हादसों से लगभग 13,800 से ज्यादा मौतें हुईं, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 14,700 के करीब पहुंच गई। यहां रॉन्ग साइड ड्राइविंग और अन्य ट्रैफिक उल्लंघनों के कारण हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। जबलपुर के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस समस्या पर ध्यान खींचा है, जिसमें गलत दिशा में वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि, यह समस्या सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं — हर मौत के पीछे एक टूटा परिवार, अधूरी सपने और अनंत दर्द होता है। सड़क सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है। अगर हम आज नहीं जागे, तो कल बहुत देर हो जाएगी। आइए, मिलकर सुरक्षित सड़कों का संकल्प लें — क्योंकि हर जान की कीमत अनमोल है!

समाधान क्या हैं?
जागरूकता फैलाएं और खुद नियमों का पालन करें।
हेलमेट, सीट बेल्ट का इस्तेमाल अनिवार्य बनाएं।
सरकार को कड़े प्रवर्तन, बेहतर सड़क डिजाइन और सख्त सजा की जरूरत है।

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