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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिपुर को शांति और विकास के रास्ते पर वापस लाने का संकल्प दोहराया है। उन्होंने कहा कि “हमारा इंफाल संभावनाओं का शहर है” और 21वीं सदी पूर्वोत्तर की है। अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री ने कुकी-बहुल चुराचांदपुर और मेइतेई-बहुल राज्य की राजधानी इंफाल दोनों जगहों पर जातीय हिंसा से विस्थापित हुए लोगों से मुलाकात की।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मणिपुर में कोई भी हिंसा दुर्भाग्यपूर्ण है। यह हिंसा हमारे पूर्वजों और हमारी अगली पीढ़ी के साथ अन्याय है। हमें मणिपुर को शांति और विकास के मार्ग पर ले जाना है।” उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में मणिपुर के लोगों के योगदान का भी स्मरण किया, यह याद दिलाते हुए कि यह मणिपुर ही था जहां भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) ने पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया था।
विस्थापितों के लिए विशेष पैकेज और सरकारी प्रयास
प्रधानमंत्री ने उन लोगों के जीवन को सामान्य बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की जो अभी भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार लगातार काम कर रही है।” उन्होंने बताया कि विस्थापितों के लिए 7,000 नए घरों को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने हाल ही में मणिपुर के लिए करीब 3,000 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज घोषित किया है, जिसमें से 500 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान विस्थापितों की सहायता के लिए किया गया है। उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने हिंसा की तपिश को सहा है, वे जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौटें, यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
शांति की अपील और केंद्र का समर्थन
इससे पहले, चुराचांदपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने सभी समूहों से शांति के मार्ग पर चलने की अपील की। उन्होंने कहा, “मैं सभी समूहों से अपने सपनों को पूरा करने और अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शांति के रास्ते पर चलने की अपील करता हूं।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार मणिपुर के लोगों के साथ खड़ी है।
इस दौरे का उद्देश्य हिंसा प्रभावित लोगों को ढाढस बंधाना और राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को उजागर करना था। चुराचांदपुर में, प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से हिंसा से विस्थापित लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।