प्रशांत किशोर पर ₹14 करोड़ घोटाले का आरोप, सांसद संजय जायसवाल ने दायर किया मानहानि केस

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर और पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल के बीच चल रहा राजनीतिक और व्यक्तिगत टकराव अब न्यायालय की दहलीज तक पहुंच गया है। मंगलवार को सांसद संजय जायसवाल ने बेतिया व्यवहार न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) कोर्ट में प्रशांत किशोर के खिलाफ परिवाद दायर किया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

सांसद जायसवाल ने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर ने न केवल बिना साक्ष्य के उनके ऊपर झूठे आरोप लगाए, बल्कि उनकी राजनीतिक छवि को जानबूझकर धूमिल करने की कोशिश की है। इस पूरे विवाद की शुरुआत बेतिया में जन सुराज कार्यक्रम के दौरान हुई थी, जहां प्रशांत किशोर ने सांसद पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें “पेट्रोल पंप बचाने” जैसी बातें भी शामिल थीं।

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इसके बाद पटना में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पीके ने न सिर्फ डॉ. जायसवाल बल्कि भाजपा के अन्य नेताओं पर भी आरोप लगाए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. संजय जायसवाल ने प्रशांत किशोर को “नटवरलाल” कहते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं स्वीकार किया है कि उन्हें रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर से ₹14 करोड़ का चंदा मिला है। उन्होंने इस दावे को आधार बनाकर प्रशांत किशोर से पांच महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं:

  1. जब अयोध्या रामी रेड्डी रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर के डायरेक्टर ही नहीं हैं, तो उन्होंने ₹14 करोड़ किस हैसियत से दिए?
  2. अगर यह चंदा जन सुराज पार्टी को मिला था, तो पार्टी के खाते में क्यों नहीं जमा किया गया?
  3. यह राशि जॉय ऑफ गिविंग ग्लोबल फाउंडेशन के खाते में क्यों दिखाई गई है? प्रशांत किशोर किस अधिकार से इस ट्रस्ट में पैसा रख रहे हैं?
  4. रामसेतु कंपनी अपने रिकॉर्ड में केवल ₹1 लाख का दान दिखा रही है, फिर ₹14 करोड़ का दावा कैसे?
  5. अगर कंपनी ने राशि “एडवांस” के रूप में दी थी, तो ट्रस्ट ने इसे “दान” कैसे मान लिया?

डॉ. जायसवाल ने आरोप लगाया कि यह एक शातिराना आर्थिक हेराफेरी है, जिसमें प्रशांत किशोर ने सरकारी ठेकों का झांसा देकर पैसे एडवांस लिए और फिर उसे “दान” की तरह पेश किया। उन्होंने यहां तक कहा कि यह सिर्फ ₹14 करोड़ का मामला नहीं है, पूरे घोटाले का आकार ₹200 करोड़ तक हो सकता है।

सांसद की ओर से कहा गया कि प्रशांत किशोर का यह कथन स्वयं स्वीकृत घोटाले का प्रमाण है, जो आगे चलकर बड़ा खुलासा बन सकता है। इस परिवाद के स्वीकार होने के बाद प्रशांत किशोर की कानूनी परेशानियाँ बढ़ सकती हैं।

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