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पटना। शेखपुरा जिले के बरबीघा में प्रशांत किशोर ने आज संकेत दिया कि वे राघोपुर, बरबीघा या हरनौत से चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन, अब यह साफ हो गया है कि वे इन तीनों सीटों से चुनाव नहीं लड़ने वाले। सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों? और फिर वे कहां से चुनाव लड़ेंगे? आइए जानते हैं।
राघोपुर सीट पर क्यों नहीं लड़ेंगे?
राघोपुर सीट पर तेजस्वी यादव विधायक हैं। इस क्षेत्र में यादव समुदाय का प्रभाव सबसे अधिक है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 30% है। इसके अलावा, यहां 21% राजपूत, 12% पासवान और 8% रविदास जाति के मतदाता हैं। ऐसे में जातीय समीकरण प्रशांत किशोर के पक्ष में नहीं दिखता, जिससे उनकी राह मुश्किल हो सकती है।
बरबीघा सीट से क्यों दूर रहेंगे?
बरबीघा विधानसभा क्षेत्र में बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह का पैतृक गांव माउर स्थित है। यहां भूमिहार समुदाय का प्रभुत्व है, जिनकी संख्या 20% से अधिक है। इसके अलावा, कुर्मी, यादव और पासवान मतदाता भी निर्णायक भूमिका में रहते हैं। इस सीट पर भी प्रशांत किशोर को कड़ी चुनौती मिल सकती है।
हरनौत सीट से क्यों नहीं लड़ेंगे?
हरनौत सीट पर कुर्मी, पासवान और यादव मतदाताओं का खासा प्रभाव है। भूमिहार, राजपूत और रविदास समुदाय के लोग भी अच्छी संख्या में हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर भी इसी सीट से शुरू हुआ था। ऐसे में यह सीट भी प्रशांत किशोर के लिए आसान नहीं होगी।
तो प्रशांत किशोर कहां से लड़ेंगे चुनाव?
सूत्रों के अनुसार, प्रशांत किशोर के लिए बक्सर और वाल्मीकिनगर सीटें सबसे अनुकूल मानी जा रही हैं।
- बक्सर – प्रशांत किशोर के पिता डॉक्टर थे और क्षेत्र में उनकी अच्छी खासी पहचान थी। इसका फायदा उन्हें मिल सकता है।
- वाल्मीकिनगर – इस क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं की बड़ी संख्या है, जो प्रशांत किशोर के समर्थन में जा सकते हैं।
ऐसे में माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर इन दो सीटों में से किसी एक से चुनाव लड़ सकते हैं।