बिहार विधानसभा चुनाव में विपक्ष की पूरी रणनीति धरी की धरी रह गई। 20 साल से सत्ता में काबिज सरकार को प्रदेश की जनता का भरोसा कायम रहा। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की जोड़ी चुनावी मैदान में करारी शिकस्त झेल गई। चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने विपक्ष को पूरी तरह उलझा दिया। वोटर लिस्ट से नाम कटने-जुड़ने के मुद्दे को लेकर विपक्ष ने ‘वोट चोरी’ का अभियान चलाया, राहुल गांधी की वोटर्स अधिकार यात्रा और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन तक की भागीदारी हुई, लेकिन जनता के वास्तविक मुद्दों- बिजली, पानी, शिक्षा और सुरक्षा से विपक्ष दूर रह गया। हार के बाद कांग्रेस ने समीक्षा बैठक में जमीन पर काम करने वाले नेताओं से सीधे फीडबैक लिया, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
दरअसल, बिहार चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस हाईकमान और प्रदेश नेताओं की लगभग 4 घंटे की समीक्षा बैठक हुई। महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि बैठक में साफ हुआ कि चुनाव “संपूर्ण जनमत नहीं, बल्कि मैनेज किया गया नतीजा” था। नेताओं ने SIR अभियान के जरिए वोटरों के नाम कटने-जुड़ने, कथित MMRY योजना के तहत पैसों का वितरण और कुछ सीटों पर समान मत अंतर का जिक्र किया। वहीं, कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि पार्टी ने महंगाई, रोजगार, पलायन और भ्रष्टाचार जैसे स्थानीय मुद्दों की ओर ध्यान कम दिया। अन्य कारणों में महिलाओं को मिली आर्थिक मदद, बूथ स्तर की गड़बड़ियां और गठबंधन दलों में तालमेल की कमी शामिल रही। AIMIM को सीमांचल में अल्पसंख्यक वोटों के बंटवारे के लिए जिम्मेदार ठहराया गया, जबकि बीजेपी पर SIR, EVM और प्रशासनिक दबाव के जरिए चुनाव प्रभावित करने का आरोप लगा। हालांकि, इस बैठक में लगभग 70 नेताओं को बैचों में बुलाया गया ताकि संभावित टकराव और बहस से बचा जा सके, हालांकि दो हार चुके उम्मीदवारों के बीच शुरुआत में ही बहस हुई।
गौरतलब है कि कुछ नेताओं ने टिकट बंटवारे और गलत चयन को पार्टी की हार की बड़ी वजह बताया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक नेता ने राहुल गांधी से कहा कि 2019 की लोकसभा हार की तरह बिहार में भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, जो राज्य प्रभारी कृष्ण अल्लावरु पर अप्रत्यक्ष निशाना माना गया। कुछ नेताओं ने राजद से गठबंधन पर सवाल उठाए और कुछ ने इसे तोड़ने की मांग भी की, क्योंकि उनका कहना था कि गठबंधन से कुछ वोट तो मिलते हैं, लेकिन अन्य समुदाय कांग्रेस के खिलाफ पोलराइज हो जाते हैं। हालांकि, राहुल गांधी ने इस तर्क को खारिज करते हुए पूछा कि जब ‘फ्रेंडली फाइट’ के बावजूद कांग्रेस इन सीटों पर हार गई, तो असली वजह क्या थी। वहीं, बैठक में उठे ये सवाल और बहस कांग्रेस के अंदर रणनीति और गठबंधन पर गहरी चिंता को उजागर करते हैं, जिससे पार्टी को अगले चुनाव में पाठ सीखने की चुनौती मिली है।