बिहार में हुए राज्यसभा चुनाव के नाटकीय घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। आंकड़ों के खेल और विधायकों की नाराजगी के बीच एनडीए ने बड़ी जीत दर्ज की है।

राज्यसभा चुनाव परिणाम;
बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ तब आया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 44-44 वोटों के साथ शानदार जीत हासिल की। चुनाव के मुख्य नतीजे इस प्रकार रहे।
नीतीश कुमार (JDU): 44 वोट (जीत)
नितिन नवीन (BJP): 44 वोट (जीत)
रामनाथ ठाकुर (JDU): 42 वोट (जीत)
उपेंद्र कुशवाहा (RLM): 42 वोट (जीत)
शिवेश राम (BJP): 30 वोट (शुरुआती), लेकिन दूसरी वरीयता के आधार पर एडी सिंह (RJD) को हराकर विजयी हुए।

महागठबंधन में सेंध;
जीत के लिए प्रति उम्मीदवार 41 वोटों की आवश्यकता थी। एनडीए के सभी 202 विधायकों ने एकजुट होकर मतदान किया, लेकिन महागठबंधन के खेमे में दरार साफ नजर आई। महागठबंधन की ओर से केवल 37 विधायकों ने ही वोट डाले।
वोटिंग से गायब रहे 4 विधायक: क्या रहे कारण?
| विधायक का नाम | पार्टी | अनुपस्थिति का कारण |
| फैसल रहमान | RJD | मां की अचानक तबीयत खराब होना (वे दिल्ली लौट गए)। |
| सुरेंद्र कुशवाहा | कांग्रेस | उम्मीदवार चयन से नाराजगी (वे दीपक यादव को प्रत्याशी बनाना चाहते थे)। |
| मनोहर प्रसाद सिंह | कांग्रेस | दलित, अल्पसंख्यक और OBC वर्ग की अनदेखी का आरोप। |
| मनोज विश्वास | कांग्रेस | विधायकों को सम्मान न मिलने की शिकायत। |
सियासी प्रभाव;
इस चुनाव ने न केवल एनडीए की एकजुटता को दर्शाया है, बल्कि कांग्रेस और राजद के भीतर चल रहे अंतर्विरोधों को भी उजागर कर दिया है। जहां भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन जीत के बाद दिल्ली रवाना हो चुके हैं, वहीं महागठबंधन अब अपने ‘लापता’ और नाराज विधायकों पर कार्रवाई या सुलह की रणनीति बनाने में जुटा है। वोटिंग में शामिल न होने पर फैसल रहमान (RJD विधायक) ने कहा- “मां से बढ़कर कुछ भी नहीं है।”