सिटी पोस्ट लाइव
बिहारशरीफ स्थित कांग्रेस जिला कार्यालय बुधवार को बगावती तेवरों का गवाह बना, जब दर्जनों नाराज़ पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश और जिला नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पार्टी के समर्पित और वर्षों से जुड़े कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर विवादित चेहरों को आगे लाने के आरोपों को लेकर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कार्यालय में ताला जड़ दिया।
इस पूरे हंगामे की जड़ 6 जून को राजगीर में आयोजित संविधान सुरक्षा सम्मेलन से जुड़ी उस सूची में है, जिसमें नालंदा जिले के कई पुराने प्रखंड अध्यक्षों के नाम हटा दिए गए। इनकी जगह नीट पेपर लीक कांड के मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के पुत्र डॉ. शिव कुमार और उनके भतीजे के नाम शामिल कर दिए गए। यही नहीं, कार्यकर्ताओं का दावा है कि संजीव मुखिया की पत्नी ममता देवी को हरनौत विधानसभा सीट से टिकट देने की तैयारी की जा रही है।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी में अब ईमानदार और ज़मीनी कार्यकर्ताओं की बजाय धनबल और बाहुबल वालों को प्राथमिकता दी जा रही है। उनका कहना है कि यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि कांग्रेस को भ्रष्टाचार और दलाली की संस्कृति से मुक्त करने की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पार्टी ने समय रहते कार्यकर्ताओं की आवाज नहीं सुनी, तो इसका खामियाजा आने वाले विधानसभा चुनावों में भुगतना पड़ेगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ दिन पहले भाजपा कार्यालय में भी आंतरिक असंतोष देखा गया था। अब कांग्रेस के भीतर पनप रही असहमति की यह चिंगारी क्या महागठबंधन की राजनीति को भी प्रभावित करेगी, यह आने वाला समय बताएगा।