सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने ‘शुभचिंतक’ गायकों पर इसका ठीकरा फोड़ा है। राजद नेतृत्व का मानना है कि चुनाव के दौरान कुछ गायकों द्वारा गाए गए आपत्तिजनक और भड़काऊ गीतों ने वोटरों के मन को आखिरी वक्त में बदल दिया, जिससे ‘जंगल राज’ के आरोपों को बल मिला। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तेजस्वी यादव ने लगभग ढाई दर्जन गायकों को कानूनी नोटिस भेजा है। संयोग से इनमें से अधिकांश गायक उन्हीं की बिरादरी (यादव) से आते हैं।
बिहार के इस घटनाक्रम का असर अब पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी दिखना शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी अपने शुभचिंतकों और गायकों को तत्काल ‘अलर्ट’ जारी किया है। अखिलेश यादव ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बिहार जैसे नकारात्मक और जातीय विषमता को बढ़ावा देने वाले गीतों से यूपी चुनाव में परहेज किया जाए। उनका यह कदम दर्शाता है कि वह बिहार में चुनावी गीतों के नकारात्मक प्रभाव की गंभीरता को समझते हैं और यूपी में वैसी गलती दोहराना नहीं चाहते।
नकारात्मक गीतों की गूंज और जंगल राज का आरोप
जहां एक समय ‘गरीबी हटाओ’ या ‘अबकी बार मोदी सरकार’ जैसे सकारात्मक नारे और गीत चुनाव जिताने का काम करते थे, वहीं बिहार में इस बार आंचलिक बोलियों (भोजपुरी-मगही) में गाए गए गीतों का नकारात्मक भाव खुलकर सामने आया। इन गीतों में खुलेआम ‘कट्टा’, ‘सिक्सर’ और ‘माल’ जैसे आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया था और उन्हें सीधे तेजस्वी यादव से जोड़ा गया।
उदाहरण के लिए, ‘मारेब सिक्सर के छह गोली छाती में…’ या जातीय वर्चस्व की बात करने वाले गाने, जैसे ‘आरजेडी सरकार बनतो, यादव रंगदार बनतो’ और ‘भैया के आवे द सत्ता में, कट्टा सटा के उठा लेबो घर से’, आदि ने पूरे माहौल को दूषित कर दिया।
NDA ने आरोपों को बनाया हथियार
NDA गठबंधन के नेताओं ने इन गीतों को हाथों-हाथ लिया और उन्हें RJD के ‘चाल-चरित्र’ से जोड़ दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सभाओं में, जैसे कि मुजफ्फरपुर की एक सभा में, 2001 के गोलू अपहरण कांड जैसे पुराने ‘जंगल राज’ के अपराधों को याद दिलाया और इन गीतों का इस्तेमाल यह स्थापित करने के लिए किया कि RJD की वापसी बिहार को फिर से अराजकता की ओर धकेल देगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी लगातार सवाल पूछते रहे कि लालू-राबड़ी राज में क्या लोग शाम के बाद सुरक्षित बाहर निकल पाते थे?
आरजेडी अब यह मानती है कि इन विवादित गीतों ने एनडीए के ‘जंगल राज’ के आरोपों को पुष्ट किया, जिससे आखिरी समय में वोटरों का मन बदल गया और महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा।
अखिलेश यादव का डर और यादव वोटों की दरार
बिहार में इन गीतों के दुष्परिणामों को देखने के बाद, अखिलेश यादव का अलर्ट जारी करना बताता है कि वह भी अब चुनावी अभियानों में ‘शुभचिंतकों’ की अति-उत्साहपूर्ण हरकतों के संभावित नुकसान को लेकर चिंतित हैं।
आरजेडी के कुछ आंतरिक सूत्रों ने यह आरोप भी लगाया है कि इन गानों को भाजपा द्वारा प्लांट किया गया होगा। हालांकि, सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि अधिकांश विवादित गायक यादव समुदाय से ही आते थे। यह घटना इस बात की ओर भी इशारा करती है कि तेजस्वी यादव को अपनी बिरादरी के 14% यादव वोटों का जो ‘एकमात्र नेता’ होने का भ्रम था, वह अब टूट सकता है, और समुदाय के लोग अब उनसे खिसक रहे हैं।