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पटना : महागठबंधन में एक ही पार्टी ऐसी है जिसकी सीटें बढ़ाने के पक्ष में राजद के युवराज तेजस्वी यादव पुरजोर तरीके से हैं। जी नहीं, यह उनकी अपनी पार्टी नहीं है। पिछले विधानसभा की तुलना में वे अपनी पार्टी की सीटें 144 से कुछ कम करने के पक्ष में हैं, लेकिन सीपीआई एमएल माले की सीटें 19 से बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि, जिस माले पर तेजस्वी यादव को सबसे ज़्यादा भरोसा था, उस माले ने भी सीएम कैंडिडेट के सवाल पर कांग्रेस के सुर में सुर मिला लिया है और कांग्रेस नेताओं की तरह गोल-मोल जवाब दे दिया है। माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्या आज पटना आए थे। पत्रकारों ने बातचीत में उनसे पूछा कि महागठबंधन का सीएम कैंडिडेट कौन होगा? इसका जवाब दीपांकर भट्टाचार्या ने बिलकुल वही दिया जो जवाब बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और दूसरे बड़े नेता लगातार दे रहे थे। बिना तेजस्वी यादव का नाम लिए गोल-मोल जवाब। दीपांकर भट्टाचार्या ने कहा कि सीएम कैंडिडेट कौन होगा, यह मुद्दा ही नहीं है। जब महागठबंधन चुनाव जीतेगा, जो बड़ा दल होगा, उसके जो नेता होंगे, वे सीएम बनेेंगे, लेकिन माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्या ने तेजस्वी यादव का नाम तक नहीं लिया। यह कांग्रेस का ही स्टैंड है कि चुनाव बाद देखेंगे। यह सांसद पप्पू यादव का स्टैंड है कि चुनाव बाद देखेंगे। पप्पू यादव ने बिलकुल यही कहा था कि तेजस्वीजी, आपको चुनाव बाद सीएम बनना है, तो बन जाइएगा, लेकिन चुनाव बिना सीएम कैंडिडेट घोषित किए लड़िए। अगर आपकी किस्मत में होगा, तो आप बन जाइएगा, लेकिन अगर अभी आपका नाम घोषित कर चुनाव लड़े, तो चुनाव में महागठबंधन को नुकसान होगा। इसका राजद की ओर से पुरजोर विरोध किया गया था, लेकिन अब राजद के नेता भी इस पर कुछ नहीं बोल रहे और तेजस्वी भी सीएम कैंडिडेट के दावे पर ढीले पड़ गए हैं। क्या तेजस्वी यादव ने भी मान लिया है कि महागठबंधन अगर उन्हें सीएम कैंडिडेट घोषित कर चुनाव लड़ेगा, तो इस वजह से महागठबंधन को नुकसान होगा और तेजस्वी यादव के वास्तव में सीएम बनने में खलल पड़ जाएगी। लगता तो ऐसा ही है। हम आपको सुनाते हैं माले के राष्ट्रीय महासचिव ने तेजस्वी यादव को सीएम कैंडिडेट बनाने पर कैसे कांग्रेस की तरह गोल-मोल जवाब दिया।
तेजस्वी को माले पर था सबसे ज़्यादा भरोसा, पर माले ने कर दी कांग्रेस वाली बात!