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शतरंज को रणनीति,धर्य और मानसिक संतुलन का खेल माना जाता हैं। विश्व शतरंज दिवस सर्वांगीण विकास, शैक्षणिक क्षमताओं और मानसिक तंदुरुस्ती का प्रतीक बन चुका है। आज आपको बताएंगे की विश्व शतरंज दिवस की शुरूआत कब और कैसे हुई और सबसे लंबा मैच कितने दिनों तक खेला गया है।
बता दे, विश्व शतरंज दिवस हर वर्ष 20 जुलाई को मनाया जाता है। यह रणनीति और कौशल से जुड़ा खेल है। और पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए इस खेल को अच्छा माना जाता है। जैसा कि आप जानते हैं कि शतरंज का एक मैच एक दिन में ही खत्म हो जाता है। लेकिन इस गेम का इतिहास कुछ और ही कहता है। हालांकि, चेस के रिकॉर्ड पर सबसे लंबा शतरंज का गेम 1989 में फिलीपींस में विश्व जूनियर शतरंज चैंपियनशिप के दौरान खेला गया था। ऐसा पहली बार हुआ है जब शतरंज का खेल चार दिनों तक चला हो। यह मैच यूगोस्लाविया के इवान निकोलिक और सर्बिया के गोरान आर्सोविक के बीच खेला गया था। यह खेल चार दिनों में 269 चालों तक चला, जिसमें कुल 20 घंटे का समय लगा था। लेकिन पचास चालों के नियम के कारण यह मैच ड्रॉ के साथ समाप्त हुआ। चलिए अब आपको बताते हैं कि पचास चालों का नियम क्या होता है। पचास चालों के नियम 50-मूव रूल भी कहते हैं। अगर पिछले पचास चालों में कोई भी मोहरा नहीं मरता है, तो खेल को ड्रॉ घोषित कर दिया जाता है। वहीं, चेस बोर्ड में कुल 64 खाने होते है। जिसमें 32 काले रंग ओर 32 सफेद रंग के होते है। प्रत्येक खिलाड़ी के पास एक राजा, वजीर, दो ऊंट, दो घोडे, दो हाथी और आठ प्यादे होते है। सबसे खुशी की बात है कि इस खेल का विश्व चैंपियन वर्तमान में एक भारतीय है। जिनका नाम डी गुकेश हैं जो सबसे कम उम्र के शतरंज विश्व चैंपियन भी हैं। गुकेश ने तत्कालीन ग्रैंडमास्टर चीन के डिंग लिरेन को हराकर सबसे कम उम्र के शतरंज विश्व चैंपियन का खिताब हासिल किया था।
गौरतलब है कि साल 1924 में फ्रांस के पेरिस में आयोजित आठवें समर ओलंपिक खेलों में 20 जुलाई को विश्व शतरंज फाउंडेशन (FIED) की स्थापना की गई थी। यूनेस्को की तरफ से एफआईइडी की स्थापना के सम्मान में 20 जुलाई को विश्व शतरंज दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया। इसके बाद 20 जुलाई 1966 में प्रथम विश्व शतरंज दिवस मनाया गया। हालांकि, यूएनओ की महासभा की ओर से 12 दिसंबर 2019 को 20 जुलाई को विश्व शतरंज दिवस के रूप में घोषित किया। आधुनिक शतरंज का पहला टूर्नामेंट 1851 में लंदन में आयोजित किया गया था। जिसके विजेता जर्मन एडोल्फ एंडरसन रहे थे।